राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान बालोतरा पुलिस की ‘कट-पेस्ट रिपोर्ट’ पर नाराजगी जताई है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने पुलिस द्वारा पूर्व में पेश रिपोर्ट को ही दुबारा पेश करने पर सख्त रुख अपनाते हुए अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी कोर्ट के साथ चालबाजी करने की कोशिश कर रही है। कोर्ट ने पचपदरा थाना के सब इंस्पेक्टर सुराराम के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और मामले की जांच के लिए सक्षम अधिकारी तैनात करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। बालोतरा जिले की रहने वाली एक महिला ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जिसमें 17 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने कॉपर्स को ढूंढकर कोर्ट में पेश करने के लिए प्रयास तेज करने का निर्देश दिया था। इससे दो दिन पहले ही पुलिस की ओर से रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी। इसमें शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी के साथ जांच अधिकारी एसआई सुराराम भी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सी.एस. राठौड़ पेश हुए। इस दौरान एएजी ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसमें कॉपर्स की खोजबीन के लिए पुलिस द्वारा किए गए प्रयास बताए गए। रिपोर्ट देख चौंके, लगाई फटकार खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि ‘यह आश्चर्यजनक है कि 15 सितंबर 2025 और 3 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट शब्दशः समान हैं। आज की रिपोर्ट में 15 सितंबर की रिपोर्ट को कट-पेस्ट कर दिया गया है, यहां तक कि बिना फुल स्टॉप और कॉमा बदले। कोर्ट को यह नोट करते हुए दुख हो रहा है कि जांच एजेंसी कोर्ट के साथ चालबाजी करने की कोशिश कर रही है। किए जा रहे प्रयासों के संबंध में नवीनतम और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय, 15 सितंबर की पुरानी रिपोर्ट को फिर से टैग करके इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पुलिस द्वारा लापता व्यक्ति को खोजने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई राजस्थान राज्य में लापता व्यक्तियों को खोजने के लिए पुलिस द्वारा की जा रही जांच के संबंध में गंभीर संदेह पैदा करती है। बालोतरा एसपी कोर्ट में उपस्थित होकर दें तथ्यात्मक रिपोर्ट मामले में गंभीर लापरवाही देखते हुए कोर्ट ने बालोतरा पुलिस अधीक्षक को मामले में उचित कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वर्तमान मामले की जांच के लिए सक्षम अधिकारी तैनात किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख पर एसपी खुद कोर्ट के समक्ष उपस्थित होंगे और एक तथ्यात्मक रिपोर्ट दाखिल करेंगे, जिसमें कॉपर्स को प्रस्तुत करने के लिए जांच एजेंसी द्वारा वास्तविक रूप से किए गए प्रयासों को स्पष्ट रूप से समझाया जाएगा। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को यह भी निर्देश दिया कि वे सब इंस्पेक्टर के खिलाफ उचित कार्रवाई करें, जिन्होंने 3 अक्टूबर की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दाखिल की है। मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।


