‘मेरे कपड़ों में छिपाया मोबाइल निकालने की कोशिश’:जयपुर में मौत पर हिंसा; पत्नी बोली- फोन में बदसलूकी के वीडियो, घरवाले बोले- मारकर लटकाया

‘मैं बकरियां चराने गई थी। एक बकरी नर्सरी में घुस गई तो वनकर्मियों ने मेरे साथ बदसलूकी की। मैं उनकी बदसलूकी का वीडियो बनाने लगी। वनकर्मियों ने मोबाइल छीनने की कोशिश की। मैंने मोबाइल कपड़ों में छिपा लिया। उन्होंने वहां से हाथ डालकर मोबाइल निकालने की कोशिश की। किसी तरह मैं वहां से भागकर आ गई और पति को फोन कर पूरी घटना बताई।’ ये आरोप है उस महिला का, जिसके पति को एक बकरी नर्सरी में घुस जाने पर वनकर्मियों ने बुरी तरह पीटा। जमवारामगढ़ निवासी युवक ने पुलिस की लापरवाही और वनकर्मियों की बर्बरता से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। युवक की आत्महत्या के बाद लोग इतने भड़क गए कि आधा दर्जन थानों से पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। मामले से जुड़ा हर सच जानने के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची। सबसे पहले पढ़िए मृतक की पत्नी की जुबानी… ‘गुरुवार दोपहर 12 बजे मैं बकरियां चराने पहाड़ी की ओर गई। यहीं वन विभाग की नर्सरी भी है। पेशे से पिकअप ड्राइवर मेरे पति खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान हमारी एक बकरी नर्सरी में जाकर चरने लगी। इस पर गुस्साए वनकर्मी मुकेश, पवन, श्याम मीणा और ड्राइवर ने मेरे साथ बदसलूकी की।’ ‘लड़ाई-झगड़ा ज्यादा बढ़ा तो मैंने वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इससे गुस्साए मुकेश पवन और श्याम ने मोबाइल छीनना चाहा। मैंने मोबाइल ब्लाउज में छिपा लिया। उन्होंने वहां हाथ डालकर मोबाइल निकालने और वीडियो डिलीट करने की कोशिश की। जैसे–तैसे मैं वहां से भागकर घर आ गई। पति को फोन करके घटना की जानकारी दी।’ बाइक पर नर्सरी पहुंचा पति ‘मेरे साथ हुई बदसलूकी का पता चलने पर मेरे पति बाइक लेकर 2.30 से 3.00 बजे के बीच नर्सरी पहुंचे। वहां आरोपियों से विरोध जताया। इस पर चारों ने मिलकर मेरे पति को अधमरा होने तक पीटा। इसके बाद पिकअप में डालकर वन विभाग के रेंजर ऑफिस पर ले आए। मेरे पति की मदद के लिए गए लोगों ने बताया कि उन्हें वहां नंगा कर लाठी और बेल्ट से पीटा था।’ ‘उनकी गर्दन, पीठ, सिर और हाथ-पैरों में काफी चोटें आई। मेरे पति ने तीनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने में गुहार लगाई लेकिन उन्हें वहां से भगा दिया गया। काफी मिन्नतें करने के बाद भी जब उसकी शिकायत नहीं ली गई तो उन्होंने 100 नंबर पर कॉल किया। वहां भी उन्हें दुत्कार दिया गया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी कॉल किया। वहां भी सुनवाई नहीं हुई।’ ‘इसके बाद उन्होंने 100 नंबर पर आखिरी बार कॉल कर कहा कि अगर एक घंटे में उनकी शिकायत नहीं लिखी गई तो वह सुसाइड कर लेंगे। इसके बाद शाम करीब 6.30 बजे पुलिस कर्मियों ने नर्सरी के पास एक छोटे से तालाब के किनारे खेजड़ी के पेड़ से उसका शव उतारकर नीमच सरकारी हॉस्पिटल भिजवाया। मुझे नहीं पता मेरे पति के साथ क्या हुआ? जब आरोपी उन्हें पिकअप में डालकर ले गए, तब तक जिंदा थे। देर शाम उनका शव मिला।’ घरवाले बोले- नहीं कर सकता सुसाइड युवक के घरवालों का कहना है कि वह सुसाइड नहीं कर सकता। युवक के चाचा कहते हैं कि जब पुलिस वाले उसकी लाश पेड़ से उतार रहे थे तब भी हमें सूचना नहीं दी। न ही बॉडी ले जाते समय हमें दिखाया। हमें तो ये भी नहीं मालूम कि वो उनकी पिटाई से मरा है या उसने सच में सुसाइड किया है। अगर सुसाइड किया होता तो पुलिस वाले उसकी लाश उतारने से पहले हमें दिखाते ताकि स्थिति साफ हो। बिना हमें सूचित किए पुलिसवाले डेड बॉडी लेकर चले गए…यह हमारे गले नहीं उतर रहा है। 50 मीटर दूर थाना, रेंज ऑफिस में होती रही बर्बरता वन विभाग का रेंज ऑफिस और रायसर थाना के बीच महज कुछ कदमों का फासला है। थाने से करीब 50 मीटर दूर युवक के साथ वनकर्मी तीन घंटे तक वनकर्मी बर्बरता करते रहे, लेकिन पुलिस को कानों कान खबर नहीं हुई। इससे भी ज्यादा गंभीर बात ये है कि मार पीट के बाद जब युवक को आरोपियों ने छोड़ा तो पुलिस ही उसे अपनी वैन में बिठाकर वापस नर्सरी छोड़कर आई थी। गांव के श्याम सुंदर गुर्जर बताते हैं कि युवक को नंगा कर बेल्ट, डंडों से मारा गया। उसकी गर्दन, पीठ, टखने, सिर और कनपटी के पिछले हिस्से समेत पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। युवक की चाची ने आरोप लगाया कि उसने सुसाइड नहीं किया। वनकर्मियों की पिटाई से उसकी जान गई। इसके बाद आत्महत्या का रूप देने के लिए बाद में नर्सरी ले जाकर पेड़ से लटका दिया गया। गांव वालों का कहना है कि यह हमारे गांव का पहला मामला है जब इस तरह सरकारी कर्मचारियों की बर्बरता से किसी निर्दोष युवक की जान गई हो। मामले में निष्पक्ष जांचकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। गर्भवती बहन पर बरसाए डंडे, 80 साल की बुजुर्ग महिला को भी पीटा शुक्रवार दोपहर घटना के विरोध में परिजन और गांव के लोग बांदीकुई दिल्ली हाईवे पर थाने के पास वन विभाग के रेंज ऑफिस के सामने धरने पर बैठे थे। समझाइश के बाद भी परिजन नहीं हटे तो पुलिस ने CI प्रदीप की अगुवाई में लाठीचार्ज कर दिया। लोगों का आरोप है कि पुलिस वालों ने न महिला देखी न बुजुर्ग, जो भी सामने आया लाठियों से मार-मारकर अधमरा कर दिया। इंसाफ के लिए धरने पर बैठी युवक की गर्भवती बहन को भी महिला पुलिसकर्मियों ने पीटा। वहीं, गांव की बुजुर्ग महिलाओं और बच्चियों पर भी लाठी बरसाई। कुछ युवकों की पुलिस से झड़प भी हुई तो कई युवतियां भी महिला पुलिसकर्मियों से उलझ गई। भास्कर ने मामले में पक्ष जानने के लिए पुलिस से भी बात की। सीआई प्रदीप का कहना था कि गुस्साई भीड़ थाने में घुस आई, तोड़ फोड़ की इसलिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकूंगा। 80 साल की दादी, दो मासूम बच्चे पूछ रहे- पापा कहां हैं युवक का दो पक्के कमरों का मकान है। घर में 80 साल की दादी, मां, पत्नी, छोटा भाई और 3 साल की बेटी व 2 साल का बेटा है। युवक के पिता का पिछले साल निधन हो गया था। परिवार की पूरी जिम्मेदारी अकेले युवक के कंधों पर थी। बूढ़ी दादी पाेते का नाम लेकर सिसक रही है। दोनों मासूम बच्चे पूछ रहे हैं-पिता कहां हैं। …. जयपुर में वनकर्मियों के मारपीट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… भीड़ ने थाने पर किया पथराव, पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे:आंसू-गैस के गोले दागकर ग्रामीणों को हटाया, वनकर्मियों की पिटाई से आहत युवक ने किया सुसाइड जयपुर में वनकर्मियों की पिटाई से आहत युवक ने सुसाइड कर लिया। गुरुवार को वनक्षेत्र में बकरियां चराने गए युवक को वनकर्मियों ने कपड़े उतरवाकर पीटा। पूरी खबर पढ़िए…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *