कठिन हालात के बाद भी मेहनत से जिले का मान बढ़ा रहे हॉकी और सॉफ्टबॉल के सितारे

कवर्धा| कबीरधाम जिले के खिलाड़ी अपनी मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों से पूरे प्रदेश का मान बढ़ा रहे हैं। जहां एक ओर शैलेंद्र वर्मा और सुमित निषाद जैसे खिलाड़ी कठिन आर्थिक हालात में भी हॉकी में परचम लहरा रहे हैं। वहीं भूपेंद्र गढ़े अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन और राज्य स्तरीय सम्मान से कबीरधाम जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन कर रहे हैं। जिले से निकले इन युवा खिलाड़ियों की संघर्ष और उपलब्धियों की कहानियां हर किसी के लिए प्रेरणा हैं। संसाधनों की कमी, आर्थिक तंगी और सीमित सुविधाओं के बावजूद यहां के खिलाड़ी न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस पर आप भी पढ़िए, इन खिलाड़ियों के उपलब्धि की कहानी… कक्षा पांचवीं से हॉकी खेलना शुरू करने वाले शैलेंद्र वर्मा आज पीजी कॉलेज में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ पिछले 7 वर्षों से लगातार हॉकी खेलते हुए उन्होंने अब तक 10 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसमें उसने 4 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए। शैलेंद्र ने चार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है। उनके पिता दीपचंद वर्मा बाजार में सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं। आर्थिक स्थिति कठिन होने के बावजूद माता-पिता ने बेटे को खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। खेल सामग्री की महंगाई के बीच भी शैलेंद्र का जुनून और मेहनत उन्हें इस मुकाम तक लाई है। शैलेंद्र कहते हैं कि उनके लिए हॉकी सिर्फ खेल नहीं, जीवन का सपना है। माता-पिता की मेहनत और त्याग ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। पहला ओपन नेशनल हॉकी खिलाड़ी है सुमित दूसरी प्रेरक कहानी है खिलाड़ी सुमित निषाद की। उनके पिता बबला निषाद फल की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और सुमित अक्सर उनकी मदद भी करते हैं। इसके बावजूद उन्होंने 2013 से हॉकी खेलना शुरू किया और अब तक 6 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। सुमित ने एक ओपन नेशनल प्रतियोगिता भी खेली है। वे अपने जिले के पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने इस स्तर पर कबीरधाम का प्रतिनिधित्व किया। बीटेक (मैकेनिकल) की पढ़ाई पूरी करने वाले सुमित फिलहाल नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन खेल से उनका लगाव अभी भी उतना ही गहरा है। इधर कबीरधाम के खिलाड़ी वर्षों से पदक जीतकर प्रदेश और जिले का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। छीरपानी ग्राउंड में सॉफ्टबॉल व बेसबॉल के खिलाफ अभ्यास करते हैं।

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