कफ सिरप का ओवरडोज बन सकता है मौत का कारण:कोमा में भी जा सकते हैं बच्चे, एक्सपर्ट ने बताया- खांसी की दवा कब दें

राजस्थान में कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत और तबीयत खराब होने की घटनाओं के बाद कई परिवार दहशत में हैं। हालांकि जांच में कफ सिरप में ऐसा कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि बच्चों को डेक्सट्रोमेथोरपन नाम की खांसी की दवा नहीं लिखी गई थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खांसी की दवा पीने से बच्चों की तबीयत क्यों बिगड़ रही है? क्या सरकारी अस्पतालों में गलत दवा मरीजों को बांटी जा रही है? या दवा की ओवरडोज बच्चों को नुकसान पहुंचा रही है? ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर पुनीत सक्सेना से बात की। पढ़िए- ये रिपोर्ट… सवाल : डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड (Dextromethorphan Hydrobromide Syrup IP) किस बीमारी में इस्तेमाल होती है और किस उम्र के मरीजों को दी जा सकती है? जवाब : ये सिरप खांसी की शिकायत होने पर दी जाती है। इसमें जो डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड (Dextromethorphan Hydrobromide) नाम का घटक मौजूद है, इसे आमतौर पर व्यस्क मरीजों को ही दिया जाता है। सवाल : क्या बच्चों को ये सिरप पिलाई जा सकती है? जवाब : आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर ये दवाई बच्चों को नहीं लिखते। बहुत तय मात्रा में ये सिरप 6 साल से बड़े बच्चों को दी जा सकती है, लेकिन इसे तय अनुपात में ही दिया जा सकता है। सवाल : 6 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए तय अनुपात क्या है? जवाब : डॉक्टर अपनी ऑब्जर्वेशन के बाद बच्चे की उम्र और उसके वजन को देखकर ही इसकी डोज तय करते हैं। सवाल : किस उम्र के बच्चों के लिए ये दवा प्रतिबंधित है? जवाब : ये सिरप 2 साल से 4 चार तक के बच्चों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। सवाल : क्या इस सिरप से व्यस्क मरीजों में भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं? जवाब : बिल्कुल हो सकते हैं। अगर मरीज कोई और दवा भी ले रहा हो और इसके साथ ये सिरप भी यूज में लेता है, तो साइड इफेक्ट नजर आ सकते हैं। इसलिए जब भी डॉक्टर के पास जाएं उन्हें पहले से इस्तेमाल हो रही दवाओं की जानकारी भी देनी चाहिए। ताकि किसी भी प्रकार के कॉम्बिनेशन से किसी दवाई का कोई साइड इफेक्ट नहीं आए। सवाल : बच्चों में डेक्सट्रोमेथोरपन सिरप के साइड इफेक्ट क्या हैं? जवाब : अगर प्रतिबंधित उम्र के बच्चे इस सिरप को पीते हैं, बशर्ते उसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं हो तो इसके कई तरह के असर देखने को मिल सकते हैं। जैसे- नींद आना और कई बार मिर्गी के दौरे तक भी आ सकते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में बच्चों को सांस नहीं आने की शिकायत भी हो सकती है। ये इतनी खतरनाक है कि इससे ऑक्सीजन की कमी होने के साथ-साथ बच्चा कोमा में भी जा सकता है। अगर ओवरडोज हो जाए तो बच्चों की मौत भी हो सकती है। इसलिए छोटे बच्चों को ये दवा नहीं दी जानी चाहिए। बड़े बच्चों में भी डॉक्टर की देखरेख में विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। सवाल : डेक्सट्रोमेथोरपन (Dextromethorphan) सॉल्ट का मिश्रण अन्य दवाओं में भी होता है क्या? जवाब : इस सॉल्ट को अन्य दवाओं में भी मिश्रित किया जाता है। इस सिरप की गुणवत्ता और मात्रा सही है तो साइड इफेक्ट न के बराबर होते हैं। सवाल : क्या खांसी ठीक करने के लिए यही सिरप उपयोग में ली जाती है? जवाब : बच्चों में खांसी या कफ ठीक करने के लिए अन्य दवाएं भी उपलब्ध हैं, जो ज्यादा सेफ हैं। खांसी कई प्रकार की होती है। उसमें डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि खांसी हुई किस कारण से है। इन्फेक्शन, एलर्जी और अस्थमा समेत कई कारण होते हैं जिससे मरीज को खांसी हो सकती है। ऐसे में सही कारण पता करने के बाद ही उचित दवा दी जानी चाहिए। सवाल : बच्चों को दवा देने में किन चीजों का ध्यान रखना होता है। जवाब : बच्चों को किस बीमारी में कौन सी दवा देनी है, उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए, कब दी जानी चाहिए, इन सभी पहलुओं का ध्यान रखकर ही डॉक्टर दवा प्रेस्क्राइब्ड करते हैं। सवाल : पेरेंट्स को बच्चों को दवा देने में क्या ख्याल रखना चाहिए? जवाब : ये काफी महत्वपूर्ण हैं। कई बार देखने को मिलता है कि पेरेंट्स घर में रखी हुई कोई भी दवा को बच्चों को दे देते हैं। किसी व्यस्क के लिए लिखी गई दवा को भी बच्चों को पिला दी जाती हैं। ऐसा करना कई बार घातक हो सकता है। बिना डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन के बच्चों को दवा नहीं देनी चाहिए। सवाल : कई बार डॉक्टर जो दवा लिखते हैं वितरण केन्द्र पर दूसरी दवा दे दी जाती है, ऐसे मामलों में क्या किया जा सकता है? जवाब : कोई भी दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं लेनी चाहिए। राजस्थान में 2 मौतें, जांच रिपोर्ट में दवा कंपनी को क्लीन चिट जिस खांसी की सिरप Dextromethorphan hydrobromide syrup ip से मौत और तबीयत होने के मामले सामने आए हैं, उसकी सप्लाई सरकारी अस्पतालों में आरएमएससीएल (राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड) करता है। यह दवाई एक निजी फार्मा कंपनी से तैयार करवाई जाती है। हाल ही में भरतपुर और सीकर में 2 बच्चों की मौत के पीछे भी इसी दवा को कारण माना जा रहा था। लेकिन शुक्रवार को नमूनों की लैब रिपोर्ट में दवा में ऐसी कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। दवा कंपनी को मानकों पर खरा पाया गया है। — राजस्थान की खतरनाक दवाओं की यह खबर भी पढ़िए… नकली दवाइयां बनाने वालों को बचाने वाला अफसर सस्पेंड:ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा ने आंकड़ों में की थी हेरफेर, भास्कर एप की खबर का असर नकली दवा बनाते पकड़ी गई कंपनियों को बचाने वाले अफसर को सस्पेंड कर दिया गया है। दैनिक भास्कर ने ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा द्वारा नकली दवाओं के आंकड़ों में हेरफेर के कारनामों को उजागर किया था। पढ़ें पूरी खबर…

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