भास्कर न्यूज | कवर्धा गर्मी में पानी की संभावित कमी को देखते हुए कबीरधाम जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पूरे जिले को जलाभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने छत्तीसगढ़ पेयजल परीक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत यह आदेश जारी किया। यह आदेश इस वर्ष 10 अप्रैल से 30 जून तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति या संस्था नलकूप खनन नहीं कर सकेगा। यह नियम जिले के सभी नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू रहेगा। केवल शासकीय एजेंसियों को पेयजल सप्लाई के लिए आंशिक छूट दी गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर पालिका परिषद कवर्धा और जिले की सभी नगर पंचायतों को अपने क्षेत्र में पेयजल के लिए नलकूप खनन की अनुमति रहेगी। लेकिन इन्हें भी खनन की जानकारी संबंधित अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। निजी व्यक्ति, संस्था या अन्य एजेंसियों को नलकूप खनन के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से लिखित अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति खनन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने नलकूप खनन की अनुमति देने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी को कवर्धा नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि कवर्धा, सहसपुर लोहारा, पंडरिया और बोड़ला उप विभागों के ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अनुमति देंगे। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) के मुताबिक कबीरधाम जिले में वर्तमान में भूजल स्तर 120 फीट से अधिक नीचे जा चुका है। स्थिति ऐसी है कि पंडरिया ब्लॉक के कई क्षेत्र में 300 फीट में बोर खनन कराए जाने पर पानी नहीं मिल रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने तो पंडरिया ब्लॉक को क्रिटिकल जोन में रखा है। इस ब्लॉक में भूजल को लेकर संकट ज्यादा है।


