कोंडागांव में संत शिरोमणि कबीर की जयंती पर कबीर कुटीर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राम मंदिर तालाब के पास स्थित कबीर कुटीर में कबीरपंथी समाज ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम की शुरुआत संत कबीरदास के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। स्थानीय भजन मंडली ने कबीर के भजन और दोहों की प्रस्तुति दी। कबीर के प्रसिद्ध दोहे “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय” की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक हो गया। कबीरपंथी समाज के कार्यकर्ताओं ने सेवा भाव के तहत दिनभर राहगीरों को शर्बत वितरित किया। गर्मी में राहगीरों ने इस पहल की सराहना की। सत्संग में वक्ताओं ने कबीर के जीवन और शिक्षाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज में भेदभाव बढ़ रहा है, कबीर के विचार समरसता का संदेश देते हैं। कार्यक्रम में बच्चों ने कबीर के जीवन पर आधारित लघुनाटिका प्रस्तुत की। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए ज्ञानवर्धक रही। कार्यक्रम में सभी जाति-धर्म के लोग शामिल हुए। आयोजकों ने अगले वर्ष इस आयोजन को और बड़े स्तर पर करने की घोषणा की।


