शहर में 10 रुपए में मिलने वाला जगन्नाथ फूड आज जरूरतमंदों की जिंदगी बदलने वाली पहल बन चुका है। इसकी खास बात यह है कि अब वही लोग इसके सहायक बन रहे हैं, जो कभी खुद यहां लाइन में लगकर 10 रुपए की थाली लिया करते थे। उस समय उनके पास इतना ही सहारा था कि इस सस्ती थाली से पेट भरकर दिन गुजार सकें। समय के साथ मेहनत रंग लाई और उनकी परिस्थितियां सुधरीं, लेकिन उन दिनों की यादें आज भी उनके दिल में बसती हैं। शायद यही वजह है कि सक्षम होने के बाद वे उसी स्टॉल पर लौटते हैं, लेकिन थाली लेने नहीं, बल्कि किसी और की थाली भरने के लिए। कोई जरूरतमंदों के लिए राशन देता है, तो कोई संस्था को आर्थिक मदद कर जाता है। स्टॉल संचालकों के अनुसार, रोज कई लोग आकर कहते हैं ‘कभी हमने यहां खाकर दिन निकाला था, आज कोई और भूखा न रह जाए।”जगन्नाथ फूड का यह छोटा-सा स्टॉल सिर्फ भूख नहीं मिटाता, बल्कि संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की लौ जगाता है। कमाई का 15% जगन्नाथ सेवा हैबोवाल निवासी रमेश वालिया बताते हैं कि कभी उनका पूरा परिवार 10 रुपए की जगन्नाथ थाली से पेट भरता था और आज वे अपनी कमाई का 15% हर महीने जगन्नाथ फूड फॉर लाइफ में दान करते हैं। रमेश कहते हैं कि 2008 में उनकी गाड़ी से एक्सिडेंट हुआ था। केस होने के बाद स्थिति बदलने लगी। 2012 में केस जीतने के बाद हालात सुधरने लगे। धीरे-धीरे कारोबार वापस पटरी पर आ गया। 30 लोगों के लिए राशन देते बहादुर के रोड के रहने वाले विक्रम सलुजा को घर में खाने के लाले पड़ गए थे। विक्रम ने 2018 से 2023 तक रोज 10 रुपए की जगन्नाथ थाली खाकर अपना पेट भरा। जुलाई 2023 में उन्हें जैमेटो में डिलिवरी का काम मिला। विक्रम हर महीने 30 लोगों के भोजन का पूरा राशन देते हैं। विक्रम कहते हैं कि जिस थाली ने मुझे भूखा नहीं सोने दिया, आज उसकी सेवा को आगे बढ़ाना मेरा फर्ज है। हर रोज 1500 गरीबों को फ्री में दी जाती है थाली लुधियाना| जगन्नाथ फूड फॉर लाइफ पिछले डेढ़ साल से रोज 1500 झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीबों तक मुफ्त भोजन पहुंचा रहा है, जबकि 3000 लोगों को सिर्फ 10 रुपए में ‘जगन्नाथ थाली’ उपलब्ध कराई जाती है। संस्थान के चेयरमैन सतीश गुप्ता बताते हैं कि यहां हर रोज तैयार होने वाले भोजन का पहला निवाला भगवान जगन्नाथ जी को भोग रूप में अर्पित होता है, फिर इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है। 2018 में गरीबों की सेवा के उद्देश्य से शुरू हुई यह पहल आज हर दिन 4500 लोगों का पेट भर रही है।


