शहडोल संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की गई है। कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने बुढार और ब्यौहारी के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) का 15-15 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। संभाग स्तरीय बैठक में जब स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली, तो कमिश्नर ने यह कार्रवाई की। काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं, चाहिए ठोस नतीजे आयुक्त कार्यालय में हुई इस बैठक में कमिश्नर ने साफ लफ्जों में कहा कि लोगों को बेहतर इलाज देना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अस्पतालों में डॉक्टर और संसाधन मौजूद हैं, तो उनका पूरा फायदा जनता को क्यों नहीं मिल रहा? उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब सिर्फ कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, जमीन पर ठोस परिणाम दिखने चाहिए। गर्भवती महिलाओं की सेहत पर विशेष नजर बैठक में मां और बच्चे की सुरक्षा को सबसे जरूरी काम बताया गया। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि हर गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन और समय पर जांच होनी चाहिए। खासकर उन महिलाओं पर ज्यादा ध्यान देने को कहा गया जिनमें खून की भारी कमी (एनीमिया) है। ऐसी महिलाओं की डिलीवरी की तारीख से 50 दिन पहले ही कड़ी निगरानी शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, जच्चा-बच्चा की मौत के हर मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर एक्शन लेने को कहा गया है। टीकाकरण और बीमारियों के खिलाफ अभियान में तेजी टीकाकरण में हो रही देरी पर कमिश्नर ने सख्त निर्देश दिए कि एक भी बच्चा इससे छूटना नहीं चाहिए। इसके अलावा टीबी, फाइलेरिया और अंधत्व निवारण जैसे सरकारी कार्यक्रमों को गंभीरता से चलाने की हिदायत दी गई। निक्षय मित्र योजना और सिकल सेल एनीमिया की जांच में भी किसी भी तरह की कोताही न बरतने को कहा गया है। कुपोषण मिटाने और एंबुलेंस सेवा सुधारने पर जोर बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण केंद्रों (NRC) में सभी बेड भरने और बच्चों की माताओं की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड बनाने के काम में तेजी लाने और 108 एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को सुधारने की भी समीक्षा की गई। बैठक में संभाग के तीनों जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन और बीएमओ मौजूद रहे।


