झाबुआ जिले के करड़ावद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में डॉ. अंतिम सोलंकी की पदस्थापना से क्षेत्र की लगभग 15 हजार आबादी में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद जगी थी। हालांकि, डॉ. सोलंकी को तीन दिन सारंगी में ड्यूटी देने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग का अतिरिक्त प्रभार सौंपने के कारण यह उम्मीद टूटती नजर आ रही है। डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में करड़ावद PHC की जिम्मेदारी अन्य स्टाफ पर आ गई है। इससे ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी दूरस्थ स्थानों पर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, PHC में स्थायी डॉक्टर न होने के कारण केवल छोटे-मोटे मामलों को ही देखा जाता है। वर्तमान में PHC की ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज आते हैं। इन्हें प्राथमिक इलाज तो मिल जाता है, लेकिन डॉक्टर की कमी के कारण साधारण इलाज के लिए भी मरीजों को पेटलावद या अन्य दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ता है। डॉक्टर के अभाव में अस्पताल में इलाज ठप ग्राम के पूर्व उपसरपंच नारायण आंजना ने बताया कि करड़ावद और आसपास की लगभग 15 हजार आबादी के लिए यह अस्पताल सबसे नजदीक है। हालांकि, जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण यहां केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। डॉक्टर के अभाव में गर्भवती महिलाओं और आम मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। करड़ावद के अलावा रामगढ़, केसरपुरा जैसी आसपास की ग्राम पंचायतों के निवासियों के लिए भी यही अस्पताल निकटतम विकल्प है। मरीजों को समय पर सही उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भटकना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, शासकीय क्वार्टर भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जिनके नवीनीकरण की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने चौकीदार और डिलीवरी पॉइंट खोलने की मांग ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से करड़ावद PHC में तत्काल एक स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति करने की मांग की है। उन्होंने अस्पताल में चौकीदार रखने और एक डिलीवरी पॉइंट खोलने की भी मांग की है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही प्रसूताओं और आम मरीजों को आवश्यक इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस संबंध में सीबीएमओ डॉ. एम.एल. चोपड़ा ने बताया कि दो जगह ड्यूटी होने के कारण कुछ समस्या है, जिसे शीघ्र ही दूर कर दिया जाएगा।


