दस साल पुराने मामले में गुरदासपुर कोआपरेटिव बैंक तारागढ़ में तैनात बैंक प्रबंधक और पटवारियों की मिलीभगत से जाली दस्तावेज लगाकर लोन देने और रिश्वत खाने के मामले में बैंक के तत्कालीन प्रबंधक कौशल खजूरिया समेत 20 लोगों को अदालत ने चार-चार साल की सजा और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो अमृतसर के डीएसपी वरिंदर सिंह ने की थी, जिसके बाद 16 दिसंबर 2014 को विजिलेंस ब्यूरो अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई थी। हर लोन के लेते थे 2 लाख रुपए जांच में पाया गया था कि बैंक प्रबंधक से मिलीभगत कर जाली दस्तावेज बनाकर अलग-अलग लोगों को 1 करोड़ से अधिक के लोन दिए गए और उनसे अनधिकृत तौर पर पैसे लेकर धोखाधड़ी की गई। मैनेजर व क्लर्क ने लोन के हर लाभार्थी से दो-दो लाख की रिश्वत ली। छह-छह लाख के 17 लोगों को लोन दिए गए जिसके लिए पटवारी और लंबरदार से राजस्व रिकॉर्ड के जाली दस्तावेज तैयार किए गए।


