करौली को राष्ट्रीय विरासत मानचित्र पर स्थापित करने पर जोर:इंटेक की बैठक में ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा पर जताई गई चिंता

करौली में भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) के करौली चैप्टर की बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता चैप्टर कन्वीनर और पूर्व राजपरिवार के कृष्ण चंद्र पाल ने की। बैठक में करौली की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर चिंता व्यक्त की गई। राव शिवराज सिंह ने बैठक का एजेंडा प्रस्तुत किया। शुरुआत में कैलादेवी ट्रस्ट द्वारा करौली रियासत के पूर्व महाराज गोपाल सिंह की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय का स्वागत किया गया और ट्रस्ट के सोल ट्रस्टी कृष्ण चंद्र पाल के प्रति आभार व्यक्त किया गया। बैठक में करौली की ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों, हवेलियों, परकोटे और प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण को लेकर गहरी चिंता जताई गई। पूर्व विधायक रोहिणी कुमारी ने कहा कि करौली धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, लेकिन पर्यटन विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से करौली को राष्ट्रीय विरासत मानचित्र पर स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। महादेव सिंह दांतली ने भद्रावती नदी के प्रदूषण और उसके विलुप्त होने पर चिंता व्यक्त की। वहीं, पुष्पेंद्र बंसल ने परकोटे की मूल संरचना को बचाने के लिए अतिक्रमण हटाने और मरम्मत कार्य की मांग की। विरासत शिक्षा प्रभाग के राजेंद्र दीवान ने हेरिटेज जागरूकता से संबंधित प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने चैप्टर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलने पर प्राप्त ट्रॉफी कन्वीनर को भेंट की। जितेंद्र सिंह पिचानोत ने शिकार महल, बहादुरपुर किला और तिमनगढ़ सहित कई धरोहरों के नष्ट होने पर चिंता प्रकट की। एडवोकेट संतोष सिंह भदौरिया ने सुझाव दिया कि गिरवर सिंह की हवेली को संरक्षित कर उसे कला केंद्र, संग्रहालय और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विकसित किया जाना चाहिए। कन्वीनर कृष्ण चंद्र पाल ने बताया कि प्राचीन मंदिरों के संरक्षण के लिए कैलादेवी ट्रस्ट आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने शहर के मंदिरों में सामूहिक आरती शुरू करने का भी सुझाव दिया। बैठक का समापन स्पिक मैके कलाकार अनमोल की भजन प्रस्तुति के साथ हुआ।

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