करौली बाईपास सर्वे में बदलाव पर कॉलोनीवासियों का प्रदर्शन:88 मकानों पर क्रॉसिंग के निशान, भूमाफिया से मिलीभगत का आरोप

करौली शहर में प्रस्तावित एनएच-23 बाईपास को लेकर विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। बाईपास के सर्वे में बदलाव का आरोप लगाते हुए विभिन्न कॉलोनियों के निवासियों ने प्रदर्शन किया और इसे आबादी से दूर ले जाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान, कॉलोनीवासियों ने जिला प्रभारी मंत्री और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम को एक ज्ञापन सौंपकर बाईपास को आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भूमाफियाओं से मिलीभगत कर बाईपास के सर्वे में परिवर्तन किया गया है। उनके अनुसार, वर्तमान सर्वे में 88 मकानों पर क्रॉसिंग का निशान लगाया गया है, जबकि कई भूखंड भी बाईपास की जद में आ रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में परिवारों के विस्थापन का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि वर्ष 2005 और 2013 में मास्टर प्लान के तहत जो सर्वे हुआ था, उसमें बाईपास का मार्ग आबादी से दूर निर्धारित किया गया था। उन्होंने मांग की कि बाईपास को उसी पुराने मास्टर प्लान के अनुरूप निकाला जाए। कॉलोनीवासियों ने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान प्रस्तावित मार्ग से ही बाईपास निकाला गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। विरोध प्रदर्शन में लक्ष्मण विहार, मां वैष्णो देवी नगर, श्याम नगर, आदित्य नगर, कृष्णा कॉलोनी, गौतम बुद्ध नगर, सहरानिया का पूरा, दुर्गेश घाटा और गैस गोदाम क्षेत्र सहित आसपास की कई कॉलोनियों के लोग बड़ी संख्या में शामिल रहे।
इस मामले को लेकर क्षेत्रवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल करौली कलेक्ट्रेट पहुंचा और जिला प्रभारी एवं गृहमंत्री जवाहर सिंह बेढम से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को सर्वे में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी और बाईपास को आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग रखी। मुलाकात के दौरान मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने क्षेत्रवासियों की बात गंभीरता से सुनी और मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि आमजन के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद फिलहाल प्रदर्शन शांत हो गया है, लेकिन कॉलोनीवासियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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