कर्ज उतारने के लिए अपने परिचित बैंक एजेंट की हत्या कर शव बोरे में बंद कर फेंकने वाले 2 हत्यारों को जिला कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। खास बात यह कि सुनवाई में गवाह तो मजबूत रहे ही, साथ ही डिजिटल इविडेंस और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरे घटनाक्रम से मिल गई। इसके चलते केस मजबूत रहा और दोनों पर दोष सिद्ध हुआ। पहले जानिए क्या है मामला 17 अगस्त 2022 को दुर्गा नगर निवासी किरण सिंह ने राजेंद्र नगर थाने पर रिपोर्ट दर्ज की। बताया- उसके पति हुकुम सिंह बंधन बैंक में कलेक्शन एजेंट हैं। वे 16 अगस्त को सुबह 7 बजे घर से बैंक के लिए रवाना हुए थे। वे रोज 1 से 2 बजे खाना खाने के लिए घर आ जाते थे, परंतु दोपहर को घर पर खाना खाने के लिए नहीं आए। 1 बजे फोन लगाने पर उनका मोबाइल फोन बंद आ रहा था। काफी देर तक उसके पति घर पर नहीं आए तो उसने ससुर हजारीलाल वर्मा को मोबाइल पर उसके पति हुकुमसिंह के घर पर नहीं आने की सूचना दी। फिर आसपास व रिश्तेदारों में और गांव पर पता किया पर कोई पता नहीं चला। इस पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की। दो दिन बाद मिला शव
19 अगस्त 2022 को राऊ थाने में एक व्यक्ति ने सूचना दी कि वह ड्राइवरी करता है। दोपहर को वह अपने किसी काम से कमल नगर जा रहा था। जैसे ही पुलिया पर पहुंचा तो नाले में एक शव बोरे में बंधा दिखा। इस पर पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। इसी दिन मृतक की पहचान रामचरण नामक व्यक्ति ने अपने भाई हुकुमसिंह के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य मिले। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे तो हुकुम सिंह का परिचित असलम पिता असगर खान (46) निवासी राऊ अपनी बाइक पर हुकुम को बैठाकर ले जाते दिखा। पुलिस ने उससे पूछताछ की तो पहले तो वह इनकार करता रहा। फिर सख्ती बरतने पर अपने दोस्त नंद किशोर उर्फ नंदू पिता दादाराव बिडकर (37) निवासी राऊ के साथ हुकुम सिंह की हत्या कबूली। नंदकिशोर को भी गिरफ्तार किया। दोनों ने कबूला कि हुकुम सिंह कलेक्शन एजेंट था। दोनों उसके परिचित थे। उन्हें पता था कि उसके पास डेली कलेक्शन के लाखों रुपए रहते हैं। इस पर उन्होंने कर्ज से छुटकारा पाने के लिए साजिश रची। सिर पर पत्थर से किए वार घटना वाले दिन असलम उसे योजनाबद्ध तरीके से अपने साथ ले गया। फिर उसने और नंदकिशोर ने हुकुमसिंह के सिर पर पत्थर से वार किए। फिर जब वह निढाल हो गया तो असलम के घर में पड़ी रस्सी से उसका गला घोंट दिया। फिर शव को अपने घर के पीछे वाले कमरे में रख दिया। फिर आधी रात को शव को बोरे में बंद कर नाले में फेंक दिया। घटनाक्रम के दौरान असलम ने हुकुमसिंह के कलेक्शन के 20 हजार रुपए नंदकिशोर को दिए और बाकी रुपए अपने पास रख लिए। इसके साथ ही हुकुम सिंह का मोबाइल, टेबलेट, बैग, उसमें रखे दस्तावेज जला दिए। फिर दोनों ने उसकी बाइक को तेजाजी नगर ब्रिज के पास खड़ा कर दिया और चाबी झाड़ियों में फेंक दी। इन आधारों पर हुई उम्रकैद खास यह कि हुकुमसिंह के गुम होने से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी के घटनाक्रम की कड़ी, बैंक के कर्मचारियों के बयान, बैंक के ग्राहक जो हुकुमसिंह से जुड़े थे उनके और पुलिस के बयान, फोरेंसिक इविडेंस, पीएम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्यों की कड़ियां भी मिलती गई। इसके चलते दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ और उम्र कैद हुई। आरोपियों को अपराध के साक्ष्य मिटाने के मामले में भी दो-दो साल का कारावास हुआ है। शासन की ओर से पैरवी रीता भंडारी ने की। संजीव श्रीवास्तव, जिला अभियोजन अधिकारी (DPO) ने बताया- केस में सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, आरोपियों की लोकेशन, परिस्थितिजन्य साक्ष्य काफी मजबूत रहे।


