साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी जैसी घटनाओं से लोगों को जागरूक करने के लिए इंदौर पुलिस सक्रिय हो गई है। विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों को इनसे बचाव के तरीके समझाए जा रहे हैं। नुक्कड़ नाटकों के जरिए बताया जा रहा है कि साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है। इसके साथ ही, इंदौर पुलिस ने जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर विशेष डीपी (डिस्प्ले पिक्चर) और पोस्टर जारी किए हैं। इन माध्यमों से नागरिकों को सतर्क रहने, धोखेबाजों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी जा रही है। इंदौर में साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोग अपने करोड़ों रुपए गंवा चुके हैं। घटनाओं के बाद वे क्राइम ब्रांच और पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने और नागरिकों को साइबर फ्रॉड व डिजिटल ठगी से बचाने के लिए इंदौर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया पोस्टर, और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि वे इन खतरों से बच सकें। लोगों को जागरूक कर रहे एडी.डीसीपी साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी से बचाव के उद्देश्य से एडी.डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया खुद जनता के बीच जाकर जागरूकता फैला रहे हैं। वे विभिन्न समाजों, संगठनों, स्कूल-कॉलेज, बैंक, बीएसएफ, अस्पताल, वरिष्ठ नागरिक समूहों, कॉलोनियों और टाउनशिप में जाकर लोगों को साइबर अपराध और डिजिटल ठगी से बचने के उपाय बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि, अब तक वे इंदौर में 230 से अधिक स्थानों पर जाकर लोगों को जागरूक कर चुके हैं और उन्हें इन घटनाओं से बचाव के तरीके समझा चुके हैं। छप्पन दुकान पर नुक्कड़ नाटक से जागरूकता अभियान एडी.डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया और उनकी टीम ने साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए इंदौर के छप्पन दुकान पर “स्क्रीन का साया” नामक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने यह दिखाया कि किस तरह फर्जी एजेंसियों जैसे CBI, ED, क्राइम ब्रांच, CID आदि के नाम पर साइबर अपराधी आम लोगों को डराकर जाल में फंसाते हैं। कार्यक्रम के अंत में एडी.डीसीपी ने बताया कि पुलिस हमेशा अपराधियों को शारीरिक रूप से गिरफ्तार करती है, “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। इस मौके पर टीम ने करीब 500 लोगों को साइबर जागरूकता के पंपलेट वितरित किए और विभिन्न साइबर अपराधों से बचने के उपाय समझाए। इससे पहले पलासिया चौराहे पर भी टीम ने रेड सिग्नल पर रुकने वाले लोगों को पंपलेट और स्टिकर्स वितरित कर साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया। टीम ने लोगों से जागरूक रहकर साइबर अपराधों को रोकने में सहयोग देने की अपील की। डीपी से लेकर पोस्टर तक: जागरूकता के लिए पुलिस का अभियान एडी.डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि साइबर अपराधों को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए इंदौर पुलिस ने सोशल मीडिया पर विशेष डीपी जारी की हैं और शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य है कि लोग इन घटनाओं के प्रति सतर्क रहें और साइबर फ्रॉड से बच सकें। उन्होंने बताया कि समय-समय पर अलग-अलग डीपी और पोस्टर जारी किए जाते हैं ताकि जनता को सावधान किया जा सके। उन्होंने कहा, “यदि किसी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर कॉल किया जाए, तो घबराएं नहीं। तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या इंदौर पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 7049124445 पर संपर्क करें।”


