कर्ज के बोझ ने पूरे परिवार को किया खत्म:2 साल के बेटे की हत्या कर पति पत्नी ने फांसी लगाकर दे दी जान

कर्ज के बोझ ने एक परिवार का अंत कर दिया। यहां सेक्टर-9ए के स्ट्रीट-5 स्थि​त बीएसएल की जमीन पर अवैध ढंग से बने आउट हाउस में कुंदन तिवारी (37), उसकी पत्नी रेखा कुमारी (32) और दो साल के बेटे श्रेयांश का शव कमरे से बरामद किया गया। पति-पत्नी का शव एक साथ फंदे पर लटका था, जबकि बच्चे का शव बेड पर पड़ा था। पुलिस के मुताबिक प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि दंपती ने पहले अपने बेटे की तकिए से दबाकर हत्या की, फिर फांसी लगाकर जान दे दी। कुंदन मूल रूप से बिहार के बांका का रहने वाला था, जबकि पत्नी बोकारो के तुपकाडीह की थी। इन दोनों ने प्रेम विवाह किया था। पिछले एक साल से इसी आउट हाउस में किराए पर रह रहे थे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। कुंदन के परिजनों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि कुंदन ने कई लोगों से पैसे उधार ले रखा था। वह खुद को देवघर सदर अस्पताल का कर्मचारी बताता था। उस पर करीब 25 लाख रुपए का कर्ज था। इससे वह तनाव में रहता था। मकान मालिक परमेश्वर पांडेय ने बताया कि कुंदन ने उनसे भी 12 लाख रुपए लिया था। वे पैसे लौटाने का दबाव बना रहे थे। सास का आरोप…मकान मालिक ने धमकाया और पीटा, दबाव में आकर दामाद ने दी जान मृतका रेखा के माता-पिता भी सेक्टर-9 में ही रहते हैं। मां जितनी देवी ने कहा कि उनके दामाद ने मकान मालिक से लाखों रुपए का कर्ज लिया था। करीब 10 दिन पहले मकान मालिक ने उन्हें धमकाया था और मारपीट की थी। वह वहां पहुंचीं तो उन्हें भी बंधक बना लिया गया। मकान मालिक ने कहा कि अगर कुंदन ने पैसे नहीं दिए तो वह उनसे वसूली करेंगे। मकान मालिक ने सादे कागज पर उनके अंगूठे का निशान भी लिया था। इसकी शिकायत उन्होंने हरला थाने में की थी। यही नहीं, उन्होंने कुछ दिन पहले मकान मालिक को एक सोने की अंगूठी भी दी थी। लेकिन उनके दबाव ने पूरे परिवार की जान ले ली। वहीं सिटी ​डीएसपी आलोक रंजन ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही सच सामने आएगा। 25 लाख का था कर्ज, मकान मालिक से भी लिया था 12 लाख 12:30 बजे तक सब ठीक था, 1:35 बजे सब कुछ हुआ खत्म मकान मालिक के बेटे आशीष ने सबसे पहले दंपती को फंदे पर झूलते हुए देखा। आशीष ने कहा-दोपहर 12:30 बजे सब ठीक था। उस समय कुंदन ने उसे 55 रुपए दिया था और कहा था कि बेटे श्रेयांश को चोकोपाई खरीद देना। वह बच्चे के साथ दुकान पर गया और आधे घंटे बाद श्रेयांश को घर छोड़ दिया। कुंदन ने उसे थोड़ी देर बाद आने को कहा। दोपहर करीब 1:30 बजे जब वह लौटा तो दरवाजा बंद था। अंदर टीवी चल रहा था। उसने आवाज लगाई। फोन भी किया, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। करीब 1:35 बजे उसने दरवाजे को खटखटाना चाहा तो वह वह थोड़ा सा खुला। झांकने पर पति-पत्नी फंदे पर लटके दिखे। उसने तुरंत अपने पिता को इसकी जानकारी दी। फिर पिता ने हरला पुलिस को सूचना दी। पुलिस दरवाजा खोलकर अंदर गई तो बच्चे का शव बेड पर पड़ा हुआ था। मकान मालिक ने कहा- पैसे लौटाने का दबाव बना रहा था, मारपीट नहीं की मकान मालिक परमेश्वर ने मारपीट की घटना के आरोप को गलत बताया। उन्होंने कहा कि वे पैसे वापसी का दबाव बना रहे थे। लेकिन उनकी जान लेने के बारे में सोच भी नहीं सकते। उन्होंने बताया कि बच्चा तो अधिकतर समय उनके पास ही रहता था।

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