चरही | सामाजिक न्याय, समानता और सादगीपूर्ण राजनीति के प्रतीक जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती शनिवार को चरही में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। नाई समाज, चरही के तत्वावधान में लाल बंगला, घाटो रोड स्थित आयोजन स्थल पर आयोजित समारोह में हर वर्ग के लोगों ने पहुंचकर कर्पूरी ठाकुर की तस्वीर पर माल्यार्पण किया और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की चेतना थे। उन्होंने बेहद साधारण परिवार में जन्म लेकर अपने संघर्ष, ईमानदारी और जनसेवा के बल पर राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल किया। उपस्थित लोगों को बताया गया कि 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के पितोझियां गांव में जन्मे कर्पूरी ठाकुर के पिता गोकुल ठाकुर नाई का कार्य करते थे, जबकि माता रामदुलारी देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके चलते उन्हें दो वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। वक्ताओं ने याद दिलाया कि कर्पूरी ठाकुर 1952 में पहली बार विधायक बने और दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। सादगी, ईमानदारी और आमजन से जुड़ाव उनकी पहचान रही। उनके निर्णयों और नीतियों ने समाज के पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों को नई दिशा दी। वर्ष 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाना उनके योगदान की राष्ट्रीय स्वीकृति है। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जिप सदस्य बासुदेव करमाली, पंचायत समिति सदस्य आशा राय एवं समाजसेवी उमेश कुमार सिंह ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर के सपनों को साकार करने के लिए आज की पीढ़ी को शिक्षा को हथियार बनाना होगा। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक चेतना पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भुवनेश्वर ठाकुर ने की, जबकि संचालन जीतू ठाकुर ने किया। आयोजन को सफल बनाने में राजेश ठाकुर, द्वारिका ठाकुर, प्रकाश ठाकुर, बड़ेलाल, छोटे लाल ठाकुर, अरजलाल ठाकुर, रामेश्वर ठाकुर, बद्री ठाकुर, रोहन ठाकुर, नवल ठाकुर, विक्रम ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर, बैजू ठाकुर, बिनोद ठाकुर सहित ठाकुर समाज के कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा।


