भास्कर न्यूज| लुधियाना दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमसी एंड एच) और गुरु अंगद देव वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेस यूनिवर्सिटी (गड़वासु) ने जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमण (जूनोटिक इंफेक्शन) को रोकने के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रोजेक्ट के तहत हुई इस कार्यशाला में स्थानीय बूचड़खाने के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। बूचड़खाने में काम करने वाले लोग लगातार जानवरों और उनके उत्पादों के संपर्क में रहते हैं, जिससे ब्रुसेलोसिस और साल्मोनेलोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए डीएमसी एंड एच और गड़वासु ने मिलकर यह पहल की। कार्यशाला में डीएमसी एंड एच के प्रिंसिपल डॉ. जी.एस. वांडर ने दोनों संस्थानों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने में मददगार साबित होंगे। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. वीनू गुप्ता ने बताया कि बार-बार हाथ धोना, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) का उपयोग, कचरे का सही निपटान और नियमित स्वास्थ्य जांच से संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। गड़वासु के सेंटर फॉर वन हेल्थ के निदेशक डॉ. जेएस बेदी ने बूचड़खाने में आमतौर पर पाए जाने वाले जूनोटिक रोगों पर चर्चा की और सुरक्षा उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डीएमसी एंड एच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश महाजन ने जूनोटिक संक्रमण के लक्षणों पर बात की और कर्मचारियों को सलाह दी कि यदि कोई लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कार्यशाला के अंत में सवाल-जवाब का सत्र हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी चिंताएं साझा कीं और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किए। इसके अलावा, कर्मचारियों को सुरक्षा किट भी वितरित की गई, जिसमें जरूरी सुरक्षात्मक उपकरण शामिल थे। डीएमसी एंड एच और गड़वासु की यह पहल कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि जूनोटिक संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद मिलेगी।


