कलेक्टर ने कुपोषित बच्चे को गोद लिया:उमरिया में घर पहुंचकर दवाएं सौंपी, बोले- पूरे जिले को कुपोषण मुक्त बनाना है

उमरिया जिले से कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए जिले के मुखिया धरणेन्द्र कुमार जैन ने एक नई शुरुआत की है। रविवार दोपहर वे चंदवार गांव पहुंचे और वहां एक कमजोर बच्चे की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने गांव के रहने वाले छोटे बच्चे नैतिक बर्मन को गोद लिया है। वे खुद नैतिक के घर गए, परिवार से मिले और बच्चे की सेहत के बारे में पूरी जानकारी ली। उन्होंने बच्चे को जरूरी दवाइयां और ताकत देने वाली खुराक भी दी, ताकि वह जल्दी तंदुरुस्त हो सके। परिवार को दी जरूरी सलाह बच्चे के माता-पिता से बात करते हुए कलेक्टर ने उन्हें समझाया कि बच्चे के खाने-पीने का खास ख्याल कैसे रखना है। उन्होंने बच्चे की मां को सलाह दी कि उसे अच्छा और पौष्टिक खाना खिलाएं, साफ-सफाई रखें और समय-समय पर डॉक्टर को दिखाते रहें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो बच्चे को अस्पताल के विशेष पोषण केंद्र में भर्ती कराने से पीछे न हटें। अफसरों को दी निगरानी की जिम्मेदारी जिले में कुपोषण को हराने के लिए बच्चों को गोद लेने की योजना चल रही है। कलेक्टर ने विभाग के कर्मचारियों को सख्त लहजे में कहा है कि वे गोद लिए गए बच्चों की सेहत पर लगातार नजर रखें और उनके घर जाकर हाल-चाल लेते रहें। उन्होंने गांव के बाकी बच्चों की सेहत की भी जानकारी ली। जिले को स्वस्थ बनाने का संकल्प कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि उनका मकसद सिर्फ दवा बांटना नहीं है, बल्कि हर परिवार को जागरूक बनाना है ताकि कोई भी बच्चा कमजोर न रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक जिला पूरी तरह कुपोषण से आजाद नहीं हो जाता, तब तक यह कोशिश और गांव-गांव जाकर देखरेख का सिलसिला जारी रहेगा।

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