बड़वानी जिले के सिलावद स्थित आदिवासी बालक आश्रम के 50 से अधिक छात्रों ने छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अधीक्षक की शिकायत करने के लिए ये छात्र बड़वानी कलेक्टर से मिलने पैदल जिला मुख्यालय के लिए निकले। जैसे ही ये बात अधिकारियों को मिली वे मौके पर पहुंचे। सिलावद के बाहर ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार हितेंद्र भावसार ने छात्रावास के बच्चों को रोका और उनकी बात सुनी। बच्चों ने अपनी समस्या तहसीलदार और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को बताई। उनकी समस्या सुन तहसीलदार ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। और बच्चों को समझाइश दी। जिसके बाद बच्चें वापस हॉस्टल पहुंच गए। छात्र बोले- जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं अधीक्षक कक्षा 11वीं के छात्र बारकेश जमरे ने बताया कि उनके छात्रावास अधीक्षक सयाराम नरगावे उनके साथ गाली-गलौज करते हैं और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। छात्रों ने अधीक्षक पर दुर्व्यवहार करने और जान से मारने की धमकियां देने का भी आरोप लगाया। जमरे के अनुसार, अधीक्षक द्वारा उन्हें कई दिनों से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके चलते वे कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताना चाहते हैं। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक अंशुमल धनगर ने बताया कि दो-तीन दिन पहले सिलावद आश्रम के बच्चों ने उन्हें फोन कर अधीक्षक द्वारा दुर्व्यवहार, मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल की शिकायत की थी। बच्चों ने यह भी बताया कि छात्रावास में खिड़कियां नहीं लगी हैं और बीमार बच्चों को अस्पताल नहीं ले जाने दिया जाता है। धनगर ने कहा कि उन्होंने बच्चों से मिलकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र कलेक्टर से मिलने पर अड़े हुए थे। इसी कारण एबीवीपी सदस्य भी छात्रों के समर्थन में कलेक्टर कार्यालय तक उनके साथ गए। छात्रावास अधीक्षक बोले- आरोप निराधार वहीं, छात्रावास अधीक्षक सयाराम नरगावे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि वे अपने छात्रावास के बच्चों को अनुशासन में रखना चाहते हैं, उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजते हैं और मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग करने से रोकते हैं। नरगावे के अनुसार, बच्चे इन्हीं अनुशासनात्मक कदमों के कारण उनसे नाराज हैं और उन पर गलत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले उन्हें बच्चों या किसी अन्य से कोई शिकायत या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था और बच्चे अचानक सुबह छात्रावास से निकलकर कलेक्टर से मिलने पैदल चल दिए। हॉस्टल अधीक्षक ने बताया कि इन बच्चों को मैं पूरे अनुशासन में रखता हूं यही मेरी गलती है। हॉस्टल में मूलभूत सुविधाएं दी जा रही है। रहने रुकने खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था है। उसके बाद इन्हें अनुशासन में नहीं रहना है। मगर मैं इन्हें अनुशासन में रखना चाहता हूं। अभी बच्चे सिलावट चौराहे पर खड़े होकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और वह जीत पर अड़े हैं कि हम कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याओं को बताएंगे। बड़वानी जिले में यह एक तरीके का ट्रेड बन चुका है कि कुछ भी समस्या हो या कुछ भी हॉस्टल या स्कूल संबंधित शिकवा शिकायत हो की स्टूडेंट सीधे पैदल कलेक्टर से मिलने निकलते हैं। यह एक दो बार नहीं कई बार हुआ है। इसको लेकर जिला कलेक्टर ने ठोस कार्रवाई करना चाहिए जिससे इस तरीके की प्रथा बंद हो।


