जबलपुर के ग्वारीघाट नर्मदा तट पर एक लड़की नाव चला कर अपना भरण पोषण कर रही है परंतु वहां पर मौजूद कुछ लोग उसको नाव चलाने नहीं दे रहे हैं। अब लड़की ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उसको नाव चलाने की अनुमति प्रदान करते हुए लाइसेंस दिया जाए ताकि वह अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर सके। लड़की होकर नाव नहीं चला सकती कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची गौरी घाट निवासी नीतू बर्मन ने बताया कि गौरी घाट में नाव का संचालन करने पर उसे कई तरह के ताने सुनने पड़ते हैं जैसे कि तुम लड़की होकर नाव नहीं चला सकती, तुम कोई और काम करो। नीतू का कहना है कि यदि वो नौका का संचालन नहीं करेगी तो उसके घर में चूल्हा नहीं जलेगा और वो अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पाएगी, एक और तो लड़कियों को समाज में बराबरी का दर्जा देने की बात होती है लेकिन दूसरी तरफ ज़ब कोई लड़की काम करने निकलती है तो उसको पुरुष अपने से कमतर समझते हैं। पिता और भाई हैं विकलांग नीतू ने बताया कि उसके पिता पुरुषोत्तम बर्मन का एक्सीडेंट हो गया था जिसके बाद उनके हाथ में चोट आई थी तभी से वो नाव नहीं चला पा रहें हैं और उसका भाई भी दिव्यांग है। परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उसके कंधों पर है और अब वह अपने पुश्तैनी काम (नाव चलाने) को ही आगे बढ़ना चाहती है लेकिन इस काम में भी उसे परेशान किया जा रहा है जिसके कारण वह अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पा रही है ऐसे में अब उसको शासन से मदद की दरकार है।


