भास्कर संवाददाता | बैतूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा सोमवार 22 दिसंबर को बैतूल पहुंचेगी। इस यात्रा में भगवान शिव के दुर्लभ और प्राचीन ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जाएंगे। यह वही शिवलिंग है, जिसे 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण में खंडित किया गया था। मान्यता है कि उस समय मंदिर में पूजा कर रहे दक्षिण भारतीय अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार ने शिवलिंग के कुछ पवित्र अवशेष बचा लिए थे। ये अवशेष पीढ़ियों तक गुप्त रूप से पूजित होते रहे। करीब 100 साल पहले यह रहस्य शंकराचार्य जी के सामने उजागर किया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि उचित समय आने पर ये अवशेष संत शंकर को सौंपे जाएं। इसी वर्ष की शुरुआत में पुजारी कुल के प्रतिनिधियों ने ये अवशेष गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को सौंपे। उद्देश्य है कि सोमनाथ मंदिर में शिवलिंग की पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हो सके। कहा जाता है कि यह वही दिव्य शिवलिंग है, जो गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देता हुआ वायु में स्थित था। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के सौजन्य से यह ज्योतिर्लिंग बैतूल लाया गया है। संस्था की जिला समन्वयक डॉ. अल्का पाण्डे ने जिले के सभी धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे 22 दिसंबर को दोपहर 3:30 बजे रामकृष्ण बगिया में आयोजित रुद्राभिषेक और सत्संग में शामिल हों। यहां श्रद्धालु इस दुर्लभ शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे।


