डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में प्रगतिशील लेखक संघ, शब्दकार व साहित्य कला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय काव्य शिविर का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आलोचक रविभूषण ने कहा कि मनुष्य के जन्म के साथ ही कविता का आरंभ हुआ होगा। कविता हमें मनुष्यता, बंधुत्व, प्रेम, संवेदनशीलता से समृद्ध करती है। कविता मनुष्य को और बेहतर मनुष्य बनाती है। कविताओं की दुनिया में प्रवेश करना अपने अनुभव के आकाश को समृद्ध करना है। प्रसिद्ध कथाकार रणेंद्र ने कहा कि कविता आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है। प्रसिद्ध साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि कविता अपने समय और समाज से जूझती है। कविता हृदय की संवेदना से निकलती है इसलिए इसे परिभाषा में बांधना संभव नहीं है।प्रसिद्ध कहानीकार पंकज मित्र ने कहा कि कविता ही मानव की मुक्ति का प्रश्न उठाती है और आज के समय में यह जरूरी है। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि कविता जीवन में आशा का संचार करती है और मनुष्य को मानवता की ओर ले जाती है। साहित्यकार महादेव टोप्पो ने कहा कि कविता में आदिवासी जीवन दृष्टि किस तरह से आ रही है यह भी महत्वपूर्ण है। टीआरआई की उपनिदेशक मोनिका टूटी ने कहा कि यह काव्य शिविर शोधार्थियों व रचनाकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उद्घाटन सत्र में स्वागत वक्तव्य साहित्यकार रश्मि शर्मा ने दिया।


