बारां शहर में डोल मेला रंगमंच पर शनिवार रात को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। इसमें पहुंचे प्रख्यात कवि अजात शत्रु ने शिरकत की। उन्होंने नवोदित कवियों को सुझाव देते हुए कहा कि अपने बुजुर्गों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ी आपका सम्मान नहीं करेगी। कवि अजात शत्रु ने कोटा में कोचिंग करने वाले छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि कभी भी सुसाइड का विचार मन में नहीं लाना चाहिए। असफलता को विनम्रता से पुरस्कार की तरह लीजिए। कभी निराश नहीं होना है। उन्होंने कविता सुनाते हुए कहा कि मारता है वक्त चोटें सिर उठाता हूं। अपना दर्द सारा भूल जाता हूं। क्रांति संस्कारों की धरती करने को आबाद। कविता जिंदाबाद हमारी कविता जिंदाबाद। कवि हिंसक नहीं होते, तो कवि नपुंसक भी नहीं होते हैं। कवि रचनाओं के माध्यम से देश, समाज में परिवर्तन लाता है। कवि अजातशत्रु 15 बार विदेश, 7 बार लाल किला और 5 बार पीएम नरेंद्र मोदी के सामने काव्यपाठ कर चुके हैं। कवि अजातशत्रु से भास्कर डिजिटल की हुई खास बातचीत सवाल: आपने मंचीय कविता को माध्यम क्यों चुना?
जबाव: अपना कोई चयन नहीं है। दुनिया के दर्द को अपना दर्द समझकर कविता के माध्यम से बता सकते हैं। सवाल: क्या मंचीय कविता और साहित्यिक कविता में आप कोई विभाजन मानते हैं?
जबाव: मंचीय कविता भाषा की दृष्टि से सरल होती है। श्रोता आखरी पंक्ति व्यक्ति से लेकर नेता, अधिकारी होते हैं। सरल लिखना कठिन होता है। साहित्यिक का वर्ग अलग है। सवाल: मंच पर सबसे यादगार अनुभव कौन सा रहा?
जबाव:-अग्निधर्मा कवियों के साथ कविता पाठ किया है। शैलेष लोढ़ा, कुमार विश्वास, कवि बैरागी आदि के साथ काव्यपाठ। सवाल: आप हास्य और वीर रस दोनों में कविताएं करते हैं, यह संतुलन कैसे बनता है?
जबाव: कवि किसी रस का नहीं होता है। कवि वो होते हैं जिनके ह्दय से उन्मेष ही देशभक्ति है। प्रेम निकला, तो श्रृंगार और श्रोताओं के लिए हास्य हो। कवि वहीं है, जो सारे रस में कविताएं लिखे। सवाल: आज के समय में वीर रस की प्रासंगिकता को आप कैसे देखते हैं?
जबाव: मंचो पर अश्लीलता द्विअर्थी संवाद होते हैं। जो कविता अपने परिवार के साथ बैठकर नहीं सुना सकते, उसे दूसरे परिवार के बीच नहीं सुनाना चाहिए। सवाल: क्या आपको लगता है कि कविता समाज में बदलाव ला सकती है?
जबाव: कवि ही समाज में बदलाव ला सकता है। कवि, पत्रकार, राजनेता समाज में आमूलचूल परिवर्तन कर सकते हैं।
सवाल: आज के युवाओं में कविता के प्रति रुचि को आप कैसे देखते हैं?
जबाव : कविता का भविष्य, कवि सम्मेलन का भविष्य उज्जवल है। आज का समय प्रतिभाओं के लिए अच्छा है। सवाल: सोशल मीडिया के युग में कविता किस दिशा में जा रही है?
जबाव: चमक दमक का जमाना है। कविता सार्थक दिशा में जा रही है। अहंकार नहीं रखें। पुस्तकें नियमित पढ़े। नई पीढ़ी पुस्तकें पढ़ेगी तो आगे बढ़ेगी। कल्पना के सतरंगी सपने देख सकते हैं। सवाल: आप किन कवियों से सबसे अधिक प्रभावित हैं?
जबाव: पदमश्री गोपालदास नीरज, बाल कवि बैरागी, चंबल क्षेत्र के दुर्गादान सिंह गौड़, धन्नालाल सुमन, प्रेमजी प्रेम आंदोलन के गीत पढ़ते थे। हाडोती में सुरेंद्र यादवेंद्र, बाबू बंजारा आदि कई कवि है, संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। सवाल: आज के समकालीन कवियों में आपको कौन प्रेरित करता है?
जबाव: हरिओम पंवार, सुरेंद्र शर्मा, अमन अक्षर आदि। नई पीढ़ी में कविताएं सृजित हो रही है। सवाल: क्या आप किसी नए कविता-संग्रह या पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं?
जबाव: अभी नई किताब कविता जिंदाबाद है। जिसमें राजस्थान की प्रमुख कविताएं हैं। विश्व पुस्तक मेले में सर्वाधिक पुस्तकें बिकी हैं। सवाल: आपका साहित्य की ओर रुझान कैसे और कब शुरू हुआ?
जबाव: मेरे पिता व भाई कवि थे। दादाजी मेवाड़ा के अंतिम शाम के राजकीय कवि थे। स्कूल समय से ही कविता करने लगे। तब अहसास हुआ कि कविता प्रस्तुति का अच्छा माध्यम है। सवाल: अजातशत्रु” नाम का चयन आपने क्यों किया?
जबाव: अजातशत्रु बड़ी बहिन का दिया नाम है। अजातशत्रु का मतलब है कि बिना अस्त्र-शस्त्र के शत्रु को भी मित्र बना लेना।


