राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की स्मार्टफोन गारंटी कार्ड योजना के विरोध में दायर जनहित याचिका को 2 साल बाद खत्म कर दिया है। जस्टिस पुष्पेंद्रसिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य सरकार के बयान के आधार पर यह फैसला दिया कि योजना वर्तमान में प्रभावी नहीं है। वकील मुदित नागपाल द्वारा 2023 में दायर इस याचिका का निस्तारण करते समय कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि आवश्यकता हो, तो वह दुबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सरकार ने बताया- योजना अब प्रभावी नहीं
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई ने कोर्ट में 9 अक्टूबर 2023 की तारीख के पत्र के आधार पर स्पष्ट बयान दिया कि स्मार्टफोन गारंटी कार्ड योजना वर्तमान में प्रभावी नहीं है। इस बयान को कोर्ट के रिकॉर्ड में लिया गया और इसी के आधार पर पूरी याचिका को निपटा दिया गया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता माधव व्यास ने पैरवी की। दो साल तक चली कानूनी लड़ाई
यह मामला सितंबर 2023 में तब शुरू हुआ, जब गंगानगर के वकील मुदित नागपाल ने आयोजना विभाग के 21 अगस्त 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने जनहित याचिका में राजस्थान सरकार, वित्त सचिव, आयोजना सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और प्रधान महालेखाकार को प्रतिवादी बनाया था। राजकोषीय कानून का उल्लंघन
याचिकाकर्ता के वकीलों ने राजस्थान वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम की धारा 5(4) का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि राज्य सरकार को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व प्राप्तियों, व्यय, उधार और गारंटी सहित अन्य देनदारियों से संबंधित वित्तीय नीति रणनीति विवरण घोषित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसके घोषित किए बिना राज्य सरकार ने महिलाओं की कुछ श्रेणियों को गारंटी कार्ड वितरित करने का निर्णय लिया था। चुनावी प्रचार का आरोप
वकीलों ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार स्मार्टफोन के बदले गारंटी कार्ड वितरण की कार्रवाई बिल्कुल अवैध है और कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बिना कोई विशिष्ट प्रावधान किए राज्य सरकार स्मार्टफोन के बदले इसके मिलने का गारंटी कार्ड (कागजी वादा) नहीं दे सकती और राज्य सरकार की यह कार्रवाई केवल एक प्रचार स्टंट के अलावा कुछ नहीं है, जो चुनाव की पूर्व संध्या पर कुप्रथाओं की परिभाषा में आता है। आचार संहिता लगने से रुकावट
17 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ के समक्ष तत्कालीन अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह ने सूचित किया था कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) के कारण फिलहाल स्मार्टफोन के बदले गारंटी कार्ड का वितरण नहीं हो रहा है। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था। दिसंबर 2024 में योजना की स्थिति की जांच
16 दिसंबर 2024 को तत्कालीन चीफ जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ के समक्ष प्रतिवादी के वकील ने हलफनामा दाखिल करने के लिए कम समय मांगा था, ताकि कोर्ट को यह स्पष्ट रूप से बताया जा सके कि इस रिट याचिका में चुनौती के तहत योजना अभी भी जारी है या बंद कर दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2025 तय की गई थी। योजना का अंतिम परिणाम
राज्य सरकार द्वारा 9 अक्टूबर 2023 के पत्र के आधार पर यह स्पष्ट किया गया कि स्मार्टफोन गारंटी कार्ड योजना वर्तमान में प्रभावी नहीं है। इस घोषणा के साथ ही हाईकोर्ट में दो साल से चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह अधिकार दिया है कि यदि भविष्य में आवश्यकता हो तो वह पुनः कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।


