कस्टम मिलिंग के कमीशन की वसूली के लिए हर जिले में तैनात किए गए थे एजेंट

कस्टम मिलिंग के कमीशन की वसूली कारोबारी अनवर ढेबर और रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा के माध्यम से होती थी। इसके लिए कारोबारी रोशन चंद्राकर और शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया को जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों ने हर जिले में एजेंट नियुक्त किए थे। यह पैसा बीटीआई मैदान, पाम बलाजियो और बनियान ट्री जैसे पॉश कॉलोनियों के ठिकानों में एकत्र किया जाता था। हर बार पैसा छोड़ने के लिए जगह बदली जाती थी। एजेंट वहां पैसा छोड़कर चले जाते थे। फिर इस रकम का बंटवारा होता था। चालान में उल्लेख है कि कांग्रेस के हिस्से का पैसा राजीव भवन (कांग्रेस भवन) में छोड़ा जाता था। इसे कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल लेते थे। रकम बोरी और कार्टून में भरकर भेजी जाती थी ताकि किसी को शक न हो। रोशन चंद्राकर की एंट्री ही वसूली के लिए हुई ईओडब्ल्यू का दावा है कि कस्टम मिलिंग घोटाले को अमल में लाने से पहले रोशन चंद्राकर को एसोसिएशन में पद दिलाया और उसके माध्यम से वसूली शुरू कराई। एसोसिएशन को प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के लिए आगे किया गया। एक बैठक में कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि 40 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया गया। इसके बाद एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया और फिर वसूली का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें रोशन चंद्राकर और एमडी मनोज सोनी ने प्रति क्विंटल 20 रुपए कमीशन की वसूली शुरू की। यह रकम मार्कफेड के जिला अधिकारियों को दी जाती थी, जो आगे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। जिन कारोबारियों ने रिश्वत दी। उनके बिलों का भुगतान तुरंत कर दिया गया, जबकि बाकी के भुगतान रोक दिए गए। आयकर विभाग की छापेमारी में मिले चैट में खुलासा हुआ कि पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, बिजली विभाग, मार्कफेड सहित कई अन्य विभागों में गड़बड़ियां हुई हैं। ईओडब्ल्यू अब इन विभागों में हुई गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है। शराब घोटाले में शामिल आरोपी सिद्धार्थ सिंघानिया कस्टम मिलिंग में भी वसूली करता था। यह काम उसे अनवर ढेबर ने सौंपा था। उसने पैसा वसूली के लिए अंकुर पालीवाल और सूरज पवार को रखा था। कस्टम मिलिंग घोटाला: टुटेजा-अनवर के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट पेश, मिलर्स से वसूला गया 22 करोड़ रु. कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू ने रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। ईओडब्ल्यू का आरोप है कि टुटेजा ने मार्कफेड में वसूली के लिए राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पर दबाव बनाया। तत्कालीन कोषाध्यक्ष नरेश सोमानी को हटवाकर रोशन चंद्राकर को पद पर बैठाया गया। रोशन ने पदभार संभालने के बाद राइस मिलर्स से पैसा वसूला। जिन्होंने पैसा नहीं दिया, उन पर कार्रवाई की गई। टुटेजा ने पद का दुरुपयोग करते हुए 22 करोड़ कमीशन के तौर पर वसूले।

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