कांकेर में फ्लोराइड प्रभावित जल स्रोतों की होगी पहचान:कलेक्टर ने दिए प्लांट लगाने के निर्देश; 20 ग्राम पंचायतों में चलेगा जागरूकता अभियान

कांकेर जिले में फ्लोरोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने विभागीय बैठक ली। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को जिले के सभी फ्लोराइड प्रभावित स्रोतों में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने के निर्देश दिए। साथ ही बंद पड़े नलकूपों की मरम्मत करने को कहा। जिले की 20 प्रभावित ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। 52 चिन्हित स्कूलों में फ्लोराइड नियंत्रण पोषण वाटिका बनाई जा रही है। फ्लोरोसिस के नियंत्रण के लिए खान-पान में बदलाव, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और फिजियोथेरेपी जरूरी है। विटामिन सी, डी, एंटी ऑक्सीडेंट और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का सेवन भी आवश्यक है। फ्लोरोसिस से होती है ये समस्या स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फ्लोरोसिस एक जन स्वास्थ्य समस्या है। यह पेयजल, खाद्य उत्पादों और औद्योगिक प्रदूषकों से फ्लोराइड के अधिक सेवन से होती है। इससे दंत फ्लोरोसिस, स्केलेटल और नान-स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां होती हैं। फ्लोराइड का स्तर बढ़ने से दांतों और हड्डियों में विकृति आ जाती है। इससे दर्द होता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। पेयजल स्रोतों को चिन्हांकित करने दिए निर्देश कलेक्टर ने फ्लोरोसिस के रोकथाम, निदान और प्रबंधन के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि ऐसे गांवों और पेयजल स्रोतों को चिन्हांकित कर सूची उपलब्ध कराएं, जहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से अधिक है। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्रों के स्कूलों एवं बच्चों सहित समुदाय में फ्लोरोसिस की जांच करने के लिए सीएमएचओ को निर्देशित किया, जिससे मरीजों का चिन्हांकन कर समय पर उनका समुचित उपचार किया जा सके। बैठक में जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, अपर कलेक्टर जितेन्द्र कुर्रे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

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