कांके रोड निवासी श्रेया की कहानी:प्यार किया तो निभाया : हादसे के बाद मंगेतर व्हील चेयर पर था… श्रेया ने रचाई शादी

तुमको पथ में कुछ मर्यादाएं रोकेंगी, जानी-अनजानी सौ बाधाएं रोकेंगी। लेकिन… सारी बाधाएं तज, बलखाती नदिया बन, मेरे तट आना, एक भीगा उल्लास लिये… प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास की कविता की ये चंद पंक्तियां रांची के अभिमन्यु के जीवन का सहारा बन गईं। दरअसल, कांके रोड निवासी अभिमन्यु जब प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, उसी समय उनकी दोस्ती अपनी भाभी की छोटी बहन श्रेया से हुई। करीब 20 साल पहले वर्ष 2004 में हुई यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में तब्दील हो गई। दोनों के परिवार ने भी हामी भर दी। दोनों परिवार के सदस्य धूमधाम से शादी की तैयारी में जुट गए। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा हादसा हुआ कि दोनों की प्रेम कहानी का खात्मा तय हो गया। दरअसल, शादी की तैयारी के दौरान वर्ष 2006 में अभिमन्यु पूरे परिवार के साथ दिल्ली से मथुरा जा रहे थे। इस दौरान अचानक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में अभिमन्यु की मां-पिता और एक बहन की मौके पर ही मौत हो गई। अभिमन्यु की जान बच गई, लेकिन उनका स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरह डैमेज हो गया। जिंदगी तो बच गई, लेकिन अपना ही शरीर बोझ बन गया। वे बेड पर आ गए। इस अवस्था में जहां लोग मानसिक रूप से हार जाते हैं, वहीं अभिमन्यु ने अपने प्रेम को सहारा बना लिया। क्योंकि, उनकी प्रेयसी श्रेया उनके लिए इतनी समर्पित थी कि कोई मर्यादाएं, बाधाएं उन्हें नहीं रोक सकीं। श्रेया ने अभिमन्यु से मुलाकात की और हिम्मत दी कि वह दुबारा अपने पैरों पर खड़े होंगे। अंतिम सांस तक वह उनके लिए खड़ी रहेगी। बस यही वो शब्द थे, जिसने अभिमन्यु को नई ऊर्जा दी। वे फिर से ठीक होने लगे। बेड से ह्वील चेयर पर आए, फिर धीरे-धीरे चलने लगे और दोनों ने शादी की। परिवार ने शादी से इनकार किया, पर श्रेया के समर्पण के आगे झुकना पड़ा श्रेया ने अपने परिवार में अभिमन्यु से शादी करने की इच्छा जताई, लेकिन परिवार के सदस्य अभिमन्यु की स्थिति देखकर तैयार नहीं थे। लेकिन श्रेया के पापा ने जब अभिमन्यु से बात की तो उनका एक ही जवाब कि आपने अपनी बेटी काे जैसी जिंदगी दी है, हम उससे बेहतर जिंदगी देंगे। इतना सुनते ही श्रेया का परिवार शादी करने को तैयार हो गया। नवंबर 2010 में श्रेया और अभिमन्यु शादी के बंधन में बंध गए। इसके बाद श्रेया ने अपना नाम श्रेया अभिमन्यु कर लिया और आज तक उनके साथ साए की तरह खड़ी हैं। 6 साल पहले आईवीएफ से बनी मां, 2 बच्चों के साथ पति भी खुश एक निजी स्कूल में शि​क्षिका श्रेया अभिमन्यु कहती हैं… जहां प्यार है, वहां शारीरिक चुनौतियां मायने नहीं रखती हैं। मैंने अपने प्यार को पाने की जिद में सबकुछ अच्छा कर लिया। इसी जिद का नतीजा था कि छह साल पहले वर्ष 2019 में आईवीएफ से मैं दो जुड़वां बच्चों की मां बनी। बच्चों को संभालने के साथ अपने पति अभिमन्यु की देखभाल भी बखूबी कर रही हूं। बच्चे आने के बाद पति की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे उन्हें पूरा समय देते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *