कांगड़ा जिले में धर्मशाला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल शर्मा ने कांगड़ा की एसीजेएम अदालत द्वारा सुनाए गए निर्णय को सही ठहराया। एसीजेएम अदालत ने दो साल पहले सब्जी विक्रेता राजे स्याल को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी पाया था। उन्हें 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी और पीड़ित पक्ष को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। राजे स्याल ने इस फैसले के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मशाला की अदालत में अपील दायर की थी। अदालत ने इस अपील को खारिज कर दिया है। पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर सोनी ने पैरवी की। वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर सोनी ने बताया कि न्यायाधीश शीतल शर्मा ने एसीजेएम अदालत के आदेश को पूरी तरह से वैध मानते हुए आरोपी को 6 माह के साधारण कारावास और 12 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राजे स्याल को 12 जनवरी 2026 से पहले निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का भी आदेश दिया है। मामले के अनुसार, राजे स्याल कांगड़ा की श्यामा श्याम फ्रूट कंपनी, दुकान नंबर-3, सब्जी मंडी से थोक में फल-सब्जी खरीदता था। उस पर कंपनी का लगभग 9 लाख रुपये बकाया था। इस राशि के भुगतान के लिए उसने वर्ष 2015 में राकेश कथूरिया को एक चेक दिया था, जो बाद में बाउंस हो गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष को कानूनी सहारा लेना पड़ा।


