कांग्रेस का कल सिवनी में किसान आंदोलन:मक्का के गिरते दाम, बिजली समस्या और खाद-बीज की कमी पर प्रदर्शन करेंगे

सिवनी में कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों की समस्याओं पर प्रदेश सरकार को घेरा। मंगलवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश मरावी ने बताया कि मक्का के गिरते दाम, खाद-बीज की कमी और बिजली सप्लाई जैसी समस्याओं को लेकर बुधवार 10 दिसंबर को कचहरी चौक पर किसान आंदोलन किया जाएगा। मरावी ने कहा कि केंद्र सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मंडियों में व्यापारी इसे 1300 से 1500 रुपए में खरीद रहे हैं। इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। सरकार किसानों की समस्याओं पर नहीं दे रही ध्यान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार मक्का के गिरते दाम, खाद और बीज की कमी, सिंचाई और बिजली सप्लाई जैसी किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। इस आंदोलन में जिले भर से किसान शामिल होंगे। जिला कांग्रेस, किसान कांग्रेस, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस सहित सभी मोर्चा और प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी भाग लेंगे। जिले के दोनों कांग्रेस विधायक ठा. रजनीश सिंह और योगेन्द्र सिंह बाबा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। मक्का 2400 रुपए ही खरीदा जाए कांग्रेस की मांग है कि किसानों का मक्का समर्थन मूल्य 2400 रुपए पर खरीदा जाए। जिन किसानों ने पहले ही मक्का बेच दिया है, उन्हें भावांतर योजना का लाभ दिया जाए। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए और गेहूं का 2700 रुपए निर्धारित किया है, लेकिन धान बेचने में भी किसानों को परेशानी हो रही है। खाद-बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाए अन्य मांगों में किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराना, खाद की कालाबाजारी रोकना, सिंचाई के लिए प्रतिदिन 10 घंटे थ्री-फेस बिजली (सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक) निर्बाध रूप से प्रदान करना, वोल्टेज की समस्या दूर करना, मंडी की अव्यवस्थाएं सुधारना, सिंचाई हेतु ट्रांसफार्मर लगवाने पर सब्सिडी देना और लालमाटी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना शामिल है। ज्ञापन के माध्यम से जिला कलेक्टर को सौंपकर शासन से पूर्ण करने की मांग की जाएंगी। अगर मांगे पूरी नहीं होती है तो आगामी दिनों में आंदोलन जारी रहेंगे और किसानों के हितों के लिए हमेशा से ही कांग्रेस कार्य करते रही है और आगे भी करते रहेंगे और किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं होने तक किसानों की लड़ाई लड़ेंगी। जरूरत पड़ी तो आगामी दिनों में फिर और भी आंदोलन किया जाएगा।

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