भास्कर न्यूज| अमृतसर पंजाब के पूर्व डिप्टी स्पीकर एवं राजनीतिक इतिहास के प्रो. दरबारी लाल ने निगम चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत न मिलने पर कांग्रेसी नेताओं को अपना मेयर बनाने के लिए सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि गुरुनगरी के हित में अन्य दलों से समर्थन लेने में कोई गुरेज नहीं करना चाहिए। क्योंकि राजनीति में न तो कोई किसी का स्थाई दोस्त होता है और न दुश्मन। दोस्ती-दुश्मनी हालात और आवश्यकतानुसार बदलती रहती है। वर्तमान राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की बजाए आपसी जरूरत पर निर्भर करती है। कांग्रेस को 85 में से 40 सीटें हासिल हुई हैं। इनमें एक आजाद के समर्थन से 41 सीट बन चुकी। 5 विधायक पहले और 2 वर्तमान सरकार ने निगम के सदस्य नियुक्त किए हैं। इस तरह हाऊस में कुल 92 सदस्य बन गए है इनमें से कम से कम बहुमत के लिए 47 पार्षदों की जरूरत है। बड़ी पार्टी होने पर कांग्रेस का संवैधानिक अधिकार है कि हाऊस में बहुमत साबित करे। 6 पार्षदों की जरूरत है, जिसे हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं। सरकार को भी इन्हें मौका फरहाम करना चाहिए। निगम के गठन में कांग्रेस के लिए कुछ विकल्प खुले हैं । आजाद पार्षद तो दूसरा भाजपा-अकाली और तीसरा आप पार्टी से समझौता करने का। पिछले कई प्रदेशों की विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आप समझौता करके लड़े हैं। कई कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हुए हैं तो आप में भी। राजनीति अब एक खुला मैदान बन गया है, जिसमें फ्री फार आल है। अकेले आप पार्टी के लिए 23 और पार्षद इकट्ठा करना अति मुश्किल काम है। अगर इन में से कोई भी तरीका नहीं अपनाया जाता तो फिर शहरी नए निगम चुनाव के लिए तैयार रहें।


