छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को लेकर हो रही लूट और अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि हजारों वाहन मालिक गर्मी में लाइन में खड़े होकर अपमान झेल रहे हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने वाला कोई नहीं है। पूरे मामले में परिवहन विभाग और कंपनी की मिलीभगत है और अफसर भी उनके सामने बेबस नजर आ रहे हैं। कैबिनेट में हुआ था वादा, धरातल पर नहीं दिखा कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद कैबिनेट में कहा था कि हर वार्ड और पंचायत में नंबर प्लेट लगवाने शिविर लगेंगे, लेकिन ये केवल बातों तक ही रह गया। न तो शिविर लगे, न ही लोगों को कोई जानकारी दी गई। महंगे कवर बेचकर हो रही कमाई उन्होंने कहा कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नाम पर पहले ही लोगों से ज़्यादा पैसे लिए जा रहे हैं और अब जब लोग नंबर प्लेट लगवाने जा रहे हैं, तो वहीं कंपनी के कर्मचारी जबरन कवर थमा रहे हैं। जो कवर मार्केट में 50 रुपये में मिल जाता है, वो वहां 150 में बेचा जा रहा है। कार का कवर 300 रुपये में थमाया जा रहा है। ये सब खुलेआम हो रहा है, RTO अफसरों की मौजूदगी में। अफसर भी लाचार, कंपनी के आगे बेअसर कन्हैया ने कहा कि जब वो खुद पगारिया कॉम्प्लेक्स स्थित नंबर प्लेट सेंटर पहुंचे, तो वहां बेहद बदतमीज स्टाफ काम कर रहा था। गर्मी में लोग लाइन में खड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था। जब उन्होंने RTO देवांगन को फोन किया, तो उन्होंने अफसर भेजे, लेकिन कंपनी के स्टाफ पर उसका भी कोई असर नहीं पड़ा। कांग्रेस की मांग – अफसर तैनात हों, व्यवस्था सुधरे कांग्रेस ने मांग की है कि नंबर प्लेट लगवाने के लिए जो भी केंद्र बनाए गए हैं, वहां सरकार की तरफ से एक-एक अफसर तैनात किया जाए। गर्मी को देखते हुए वहां टेंट, पंखे, ठंडा पानी और बैठने की व्यवस्था की जाए। साथ ही जो अवैध रूप से कवर बेचे जा रहे हैं, उस पर तत्काल रोक लगाई जाए। वरना कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस अग्रवाल ने साफ किया है कि अगर ये लूट बंद नहीं हुई, तो कांग्रेस हर ऐसे केंद्र पर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि किसी का कारोबार छूट रहा है, कोई मजदूरी नहीं कर पा रहा, कोई दफ्तर से छुट्टी लेकर लाइन में है, लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि दो-दो दिन बाद नंबर आ रहा है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद ऐलान किया था कि वार्ड और पंचायत स्तर पर नंबर प्लेट के लिए कैंप लगाए जाएंगे, तो फिर वो क्यों नहीं लगे? सरकार को जवाब देना होगा कि जनता से किए गए वादे सिर्फ घोषणा तक ही सीमित क्यों हैं।


