अजय यादव | कवर्धा कांग्रेस शासन में नरवा गरवा घुरुवा बाड़ी योजना के तहत जिले में 445 गौठान बनाए गए थे। इन पर 33 करोड़ 29 लाख रुपए से अधिक खर्च हुआ। करोड़ों खर्च के बावजूद सभी गौठान वीरान पड़े हैं। न पानी की व्यवस्था है, न चारे की। बोर तो खुदवाए गए, लेकिन पंप नहीं लगाए गए। महिला समूहों को खाद और चरवाहों को गोबर बेचकर लाभ दिलाने का दावा किया गया था। लेकिन ज्यादातर महिलाएं अब गांव में मजदूरी कर रही हैं। आदर्श गौठान भी बदहाल हैं। शेड और अन्य सुविधाओं के नाम पर पैसा बर्बाद किया गया। जिले में 10 से अधिक आदर्श गौठान भी बनाए गए थे। इनमें पानी, बिजली, शेड और फेंसिंग की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। लेकिन अब वहां देखने वाला भी कोई नहीं है। कवर्धा जनपद के ग्राम पंचायत सिंघनुपरी का आदर्श गौठान की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जो अब बदहाल है। इसके निर्माण पर 18 लाख 24 हजार रुपए खर्च हुए थे। इसमें मनरेगा से 17 लाख 47 हजार रुपए और गौण खनिज मद से 77 हजार रुपए खर्च किए गए। जिले के गौठानों में करोड़ों रुपए खर्च िकए गए हैं। जिनमें बोड़ला ब्लॉक में 11 करोड़ 74 लाख, कवर्धा में 6 करोड़ 84 लाख, पंडरिया में 7 करोड़ 69 लाख और सहसपुर लोहारा में 7 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गई। मद लागत (रुपए में) मनरेगा 33.66 करोड़ 14वें वित्त 1.15 करोड़ रूर्बन मिशन 60.91 लाख गौण खनिज 17.35 लाख अन्य पिछड़ा वर्ग व अन्य मद 43.35 लाख वर्ल्ड बैंक 22 लाख पंचायत सचिव दिलीप साहू ने बताया कि गौठान बंद है। यहां के मवेशियों को गांव के चरवाहे ही देखरेख करते है। पंचायत को गौठान को लेकर डेढ़ साल से कोई राशि नहीं मिली है। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि जिले के गौठान योजना को लेकर राज्य सरकार से दिशा-निर्देश आने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पत्राचार किया गया है।


