नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को वोट देने वाले या दे सकने वाले मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। डॉ. महंत ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद फॉर्म-7 के जरिए सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि एक-एक बूथ पर 200-200 लोगों के नाम काटे गए तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा साबित होगा। फॉर्म-7 के बहाने सुनियोजित योजना का आरोप नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने रायपुर में बैठकों के जरिए यह रणनीति बनाई है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाए, जो भाजपा के समर्थक नहीं हैं। इसके बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए फॉर्म-7 भरकर जिला मुख्यालयों में जमा कराए जा रहे हैं। डॉ. महंत के मुताबिक एक व्यक्ति को पांच फॉर्म भरने की छूट का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके तहत एक-एक बूथ से 200 तक मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह प्रत्येक विधानसभा से करीब 20 हजार मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। धर्म और वर्ग विशेष को निशाना बनाने का आरोप डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाए जो किसी विशेष धर्म या वर्ग से हैं और कांग्रेस को वोट देते हैं या दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक लक्षित और सोची-समझी रणनीति है, जिससे खास समुदायों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन बिना पर्याप्त सत्यापन के यह मानकर नाम काटने की तैयारी कर रहा है कि संबंधित व्यक्ति वहां नहीं रहता या कहीं और स्थायी रूप से चला गया है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची की शुद्धता नहीं, बल्कि उसका “सफाया” प्रतीत होती है। निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र, ये मांगें रखीं डॉ. चरणदास महंत ने भारत निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि वर्ष 2025 में SIR की प्रक्रिया लोकतंत्र के हित में स्वागत योग्य हो सकती थी, यदि इसके बाद मताधिकार पर इस तरह का सुनियोजित हमला न किया जाता। पत्र में उन्होंने मांग की है कि फॉर्म-7 के आधार पर चल रही इस लक्षित प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। लंबे समय से लगातार मतदान कर रहे मतदाताओं के नाम संदेह के आधार पर हटाने की कार्रवाई बंद की जाए। किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले आवेदनकर्ता की पहचान, कारण, साक्ष्य और मंशा की पूरी जांच अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निगरानी या ऑडिट टीम गठित करने और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है। लोकतंत्र की रीढ़ पर हमला: महंत नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले सार्वभौमिक मताधिकार पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं को डराकर या उलझाकर उनके अधिकार छीने गए तो इससे चुनाव की निष्पक्षता और जनादेश की पवित्रता दोनों पर सवाल खड़े होंगे। डॉ. महंत ने भारत निर्वाचन आयोग से देश के लोकतांत्रिक भविष्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


