दंतेवाड़ा| जिला मुख्यालय के नाक के नीचे दम तोड़ती क्षीर सागर दुग्ध सहकारी समिति और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता टेकनार गौ संवर्धन एवं शोध केंद्र आज प्रशासन की संवेदनहीनता का जीवंत प्रमाण बन चुका है। जहां गौवंश और किसान दोनों भूख और बेबसी की कगार पर खड़े हैं। टेकनार स्थित गौ संवर्धन तथा शोध केंद्र को जिला प्रशासन ने एक अहम योजना के रूप में प्रचारित किया था। शोध के नाम पर करोड़ों की लागत से खड़ी की गई इमारतें आज खोखली साबित हो रही हैं। जिस केंद्र को गौवंश की नस्ल सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बनना था, वह आज पशुओं की बदहाली का केंद्र बन गया है। जब शोध केंद्र में ही पशुओं को पर्याप्त चारा और उपचार नहीं मिल रहा, तो जिले के सुदूर क्षेत्रों की स्थिति की कल्पना करना भी आत्मघाती है। क्षीर सागर दूध सहकारी समिति, जो दंतेवाड़ा के किसानों की आर्थिक रीढ़ होनी चाहिए थी, आज खुद वेंटिलेटर पर है।


