मप्र में सड़कों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने निराश्रित पशुओं के लिए करीब आधा दर्जन योजनाएं शुरू करने का प्लान बनाया, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी योजना नहीं पहुंची। हाल यह है कि प्रदेश में 2937 गोशालाएं संचालित हो रही हैं और इन्हें दस महीने में करीब 270 करोड़ रुपए दिए भी गए, लेकिन निराश्रित पशुओं की संख्या कम नहीं हुई। इन गौशालाओं में अभी करीब 4.22 लाख गोवंश रह रहा है। विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार अभी इतनी ही संख्या में यहां पशु रह सकते हैं, लेकिन सड़कों पर मौजूद पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार अभी सड़कों पर करीब 8.50 लाख निराश्रित पशु हैं। इनके लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी से भी सरकार का अनुबंध हुआ था। इस अनुबंध के अनुसार हाइवे पर हर 50 किमी के भीतर एक हाइड्रोलिक लेक्टर खड़ी करनी थी। साथ ही हर 50 किमी पर एक गोठान बनाई जानी थी। हाइड्रोलिक की मदद से सड़कों पर मौजूद गायों को उठाकर गोठान पर छोड़ना था। यह प्रयोग नर्मदापुरम रोड पर सफल भी रहा, लेकिन मप्र के बाकी इलाकों में इस पर काम नहीं हो पाया। इस मामले में विभागीय मंत्री लखन सिंह पटेल ने बताया कि सरकार निराश्रित पशुओं के लिए स्वावलंबी गोशालाएं बना रही हैं। जल्द यह शुरू हो जाएगाी। जानिए…योजना की हकीकत राज्य सरकार ने अप्रैल में स्वावलंबी योजना पर काम शुरू किया और अगस्त में इसे लॉन्च कर दिया। बताया गया कि इसके अंतर्गत निराश्रित पशुओं के लिए मप्र के प्रत्येक जिले में 125 एकड़ जमीन पर एक गौशाला बनाई जाएंगी। इसमें निराश्रित पशुओं को रखा जाएगा। लेकिन, अब तक केवल 20 जिलों में ही जगह तलाश की जा सकी है। इनमें भोपाल, जबलपुर, दमोह, राजगढ़, मंदसौर और रतलाम पहली प्राथमिकता में है। यहां टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू हो गई, जबकि बाकी जिलों में जगह तलाशी जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस पर काम शुरू होने में 6 माह से एक साल का समय लगेगा। टैग लगाने का प्रयोग हो चुका है फेल – निराश्रित पशुओं के कानों के ऊपर टैग लगाने को लेकर एक अभियान पशुपालन विभाग ने चलाया था, लेकिन इसका ग्रामीणों और पशु मालिकों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद इसे रोकना पड़ा। क्योंकि, इसमें मालिक का पता चलते ही उसके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान था।


