जमशेदपुर के उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी (24) का अपहरण और 14 दिन बाद उनकी सुरक्षित बरामदगी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह अपहरण केवल एक आपराधिक वारदात नहीं थी, बल्कि झारखंड में बढ़ते फिरौती अपराध का खतरनाक संकेत है। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार राज्य में फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। जहां वर्ष 2024 में फिरौती के लिए कुल 32 अपहरण के मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2025 में ये आंकड़े बढ़कर 40 पहुंच गए। व्यापारी, उद्योगपति और ठेकेदार अब अपराधियों के सीधे निशाने पर हैं। अपराध का यह बदलता पैटर्न संगठित गिरोहों की सक्रियता की ओर इशारा करता है। पुलिस की सफल कार्रवाई राहत जरूर है, लेकिन बढ़ता ग्राफ चिंता बढ़ाने वाला है। सवाल है कि क्या राज्य इस नई आपराधिक चुनौती से निपटने को तैयार है? या फिर फिरौती का यह कारोबार आनेवाले दिनों में और खतरनाक रूप लेने का संकेत दे रहा है? फिरौती के लिए अपहरण मामले में वर्ष 2024 में रांची और चतरा जिले पहले नंबर पर थे। रांची व चतरा में फिरौती के लिए 5-5 अपहरण की घटनाएं दर्ज हुई थी। दूसरे नंबर पर गुमला और रामगढ़ जिला था। यहां तीन तीन मामले दर्ज हुए थे। वहीं हजारीबाग व पाकुड़ में 2-2 घटनाएं हुई थी। इसके अलावा चतरा, गढ़वा, कोडरमा, धनबाद, पलामू, साहिबगंज, देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, लातेहार, खूंटी और पूर्वी सिंहभूम में एक एक मामले दर्ज हुए थे। फिरौती के लिए सबसे अधिक अपहरण की घटनाएं वर्ष 2025 में गिरिडीह जिले में हुई। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरिडीह जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। यहां फिरौती के लिए अपहरण की 8 घटनाएं दर्ज हुईं, जिससे गिरिडीह राज्य में पहले स्थान पर पहुंच गया। दूसरे नंबर पर रांची और देवघर रहे, जहां छह-छह अपहरण की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा हजारीबाग जिले में चार, जामताड़ा और रामगढ़ में तीन-तीन मामले दर्ज हुए। सरायकेला में दो, जबकि लातेहार, पलामू, धनबाद, चतरा, कोडरमा, खूंटी, गोड्डा और दुमका जिलों में एक-एक अपहरण की घटना दर्ज की गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी मामलों में पुलिस ने अपहृत लोगों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सुरक्षित छुड़ा लिया। कई मामलों में गिरोहों के सदस्यों की गिरफ्तारी भी हुई। इसके बावजूद बढ़ता आंकड़ा राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है।


