भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर राज्य में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) के तहत सरकारी स्कूल- कॉलेजों में बनाए गए रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर कामयाब रहे हैं। स्ट्रक्चर के तहत निर्मित डिग्गियों का उपयोग अब सरकारी स्कूलों में बगीचों को विकसित और उनकी सिंचाई के लिए किया जा रहा है। राज्य सरकार की इस पहल से न केवल पानी की बचत हो रही है, बल्कि स्कूल-कॉलेज आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को जल संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान भी मिल रहा है। नगरपरिषद के जेईएन सिद्धार्थ जांदू के अनुसार वर्ष 2016-17 में चले मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत शहर में 8 स्कूलों व 3 सरकारी कॉलेजों में करीब 42 लाख रुपए खर्च करके वर्षा जल संचयन के लिए स्ट्रक्चर बनवाए गए थे। इनमें से अधिकतर स्कूलों में यह कामयाब रहे हैं। इन स्कूल-कॉलेजों में सफल रहा वर्षाजल संचयन प्रोजेक्ट: अनुपम धींगड़ा राजकीय विद्यालय, राजकीय विद्यालय नं. 4 फायर ब्रिगेड, ब्लॉक व जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर, मटका चौक स्कूल, चौधरी बल्लूराम गोदारा कॉलेज, डॉ.भीमराव अंबेडकर कॉलेज, राजकीय माध्यमिक विद्यालय नं. 8, विद्यालय नं. 2 आदि में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर सफलता पूर्वक संचालित हो रहे हैं। राजकीय अनुपम धींगड़ा विद्यालय की कार्यवाहक प्रिंसिपल चंचल जिंदल ने बताया कि अभियान के तहत स्कूलों की छतों से वर्षा जल को सीधे डिग्गियों में एकत्र किया जाता है, जिससे सालभर बगीचे की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है। वहीं, इससे स्कूली भवनों की छत भी सुरक्षित रहती है। इस पानी का उपयोग स्कूल में फूलदार बगीचे लगाने में किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को फूलों और पौधों की प्रजातियों की जानकरी भी मिल रही है। वर्षाजल के सदुपयोग से सिंचित बगीचे से स्कूलों का सौंदर्यीकरण भी हो रहा है, जिससे आगंतुक अभिभावकों को स्कूलों में हरियाली आकर्षित कर रही है। स्कूलों में जल संसद के माध्यम से बच्चे स्वयं पानी की बर्बादी रोकते हैं और बगीचे की देखभाल करते हैं, जिससे उनमें जल संरक्षण की समझ विकसित हो रही है।


