झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता दिशोम गुरू शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर स्व. एके राय व स्व. बिनोद बिहारी महतो के साथ थी। उनके साथ राजनीति में रहते हुए गुरुजी ने हमेशा सम्मान किया। जेएमएम के यूनियन जय झारखंड मजदूर समाज के बीके चौधरी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए एक घटना का जिक्र किया जो उनके राजनैतिक साथियों के सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में सभी यूनियन ने बोकारो स्टील प्लांट को हड़ताल करने का नोटिस दिया। इसके लिए सभी यूनियन के नेताओं ने बैठक की। सभा प्रशासनिक भवन पर होनी थी। सभा को संबोधित करने के लिए मुख्य वक्ता के रूप में नेता के नाम की चर्चा होने लगी। सीटू के बीडी प्रसाद ने पूर्व सांसद स्व. एके राय का नाम लिया। लेकिन जय झारखंड मजदूर सभा के प्रयाग केजरीवाल और बीके चौधरी ने शिबू सोरेन को मुख्य वक्ता के रूप में लाना चाहते थे। मुख्य वक्ता कौन यह निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन के पोस्टर की छपाई रोक दी गई। प्रयाग केजरीवाल और बीके चौधरी ने दिशोम गुरू से इस मुद्दे पर बात की। पूरी बात सुनने के बाद गुरुजी हंसने लगे और बोले कि राय जी को ही मुख्य वक्ता रहने दीजिए, मैं खुद उनको सीनियर मानता हूं। इसके बाद पोस्टर छपा और आंदोलन शुरू हुआ। आंदोलन में गुरुजी थोड़ा पहले आ गए थे और पूर्व सांसद एके राय थोड़ी देर से सभा स्थल पर पहुंचे। गुरुजी मंच पर बैठे थे, तो एके राय मजदूरों के साथ ही मंच के सामने बैठ गए। उन्हें नीचे बैठता देखकर शिबू सोरेन तुरंत मंच से नीचे उतर गए और हाथ पकड़कर एके राय को मंच पर ले गए।


