बोकारो | वर्ष 2008 में केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार को समर्थन के मामले में शिबू सोरेन कोई निर्णय नहीं सुना रहे थे। गुरुजी के पास झामुमो के पांच सांसद थे। कांग्रेस ने सरकार बचाने के लिए झामुमो को तोड़ने की चाल चली। तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को मोहरा बनाया। मधु कोड़ा ने दो सांसद को तोड़ भी लिए। इससे गुरुजी नाराज हो गए और मधु कोड़ा को मुख्यमंत्री पद से हटाने की ठान ली। सांसद टूटने की खबर पर पार्टी के कई नेता-विधायक चीराचास के फार्म हाउस पहुंचे। गुरुजी ने कहा- संकट में घबराना नहीं चाहिए, धैर्य रखें। रात तक निर्णय लेंगे। गुरुजी अकेले सोचते रहे और देर रात निर्णय ले लिया कि कैसे केंद्र सरकार को झुकाना है और राज्य की मधु कोड़ा सरकार को गिराना है। तेलंगाना के 2 सांसद साथ लेकर केंद्र सरकार को घेरा चीराचास फार्म हाउस से बिना किसी को बताए रात में कार निकल गए। चास के दीवानगंज से पार्टी के तत्कालीन केंद्रीय महासचिव संतोष रजवार को साथ में लिए। सड़क मार्ग से कोलकाता पहुंच गए। संतोष रजवार ने कहा वे रास्ते में पूछते रहे कहां जा रहे हैं, क्या करना है? गुरुजी बोले चुपचाप बैठे रहो, अब खेला देखो। इस दौरान पश्चिम बंगाल में कई जगह पुलिस जांच में गाड़ी रोकी गई, लेकिन गुरुजी को देख छोड़ दिया। बात फैल गई और दिल्ली तक चली गई। इसके बाद गुरुजी को रोकने का काफी प्रयास हुआ, लेकिन दोनों कोलकाता पहुंचे, वहां से प्लेन से दिल्ली गए और तेलंगाना के 2 सांसद को अपने साथ लेकर चीराचास फार्म हाउस आ गए। अब मनमोहन सरकार का संकट बरकरार रहा। 2 सांसद कम हो गए, कांग्रेस सरकार परेशान, गुरुजी शांत। इसके बाद केंद्र सरकार गुरुजी के आगे नतमस्तक हो गई। गुरुजी ने शर्त रखा, मधु कोड़ा को हटाएं, मुझे समर्थन दें। कांग्रेस गठबंधन के पास केंद्र सरकार बचाने के लिए कोई विकल्प नहीं था। मधु कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेकर 12 अगस्त 2008 को शिबू सोरेन ने दावा पेश किया था। इस तरह 18 सितम्बर 2006 को झारखंड के 5वें मुख्यमंत्री बने मधुकोड़ा 709 दिन तक मुख्यमंत्री रहने के बाद सत्ता से बाहर हो गए। गुरुजी 27 अगस्त 2008 को शपथ लेने के बाद तमाड़ चुनाव हारने के बाद से 18 जनवरी 2009 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। कार से कोलकाता फिर प्लेन से दिल्ली गए… रणनीति ऐसी बनाई कि भारी पड़ गए केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार पर


