झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का बोकारो के चीराचास स्थित फॉर्म हाउस से विशेष लगाव रहा है। यह स्थान केवल एक कृषि फार्म नहीं, बल्कि उनकी आत्मा का निवास-स्थल था। एक ऐसी जगह, जहां उन्हें आत्मिक संतोष, मानसिक शांति और प्रकृति से जीवंत संवाद की अनुभूति होती थी। जब भी वे बोकारो आते थे या आसपास के क्षेत्रों में प्रवास करते थे, तो उनका अधिकतर समय इसी फार्म हाउस में बीतता था। जब वह फार्म हाउस पहुंचते थे, तब गाय, भैस, मोर सभी पालतू पशुओं को स्वयं देखते थे। किस पेड़ में क्या फल लगा है? फल क्यों नहीं लगा है? उसकी जानकारी लेने के बाद देखभाल करने वालों को अपनी सलाह भी देते थे। कई एकड़ में फैले इस फार्म हाउस की हरियाली किसी सुरम्य उपवन की तरह प्रतीत होती है। यहां तरह-तरह की सब्ज़ियां, धान, गेहूं, फलदार पेड़, फूलों की क्यारिया और पारंपरिक फसलें उगाई जाती थीं। गुरुजी स्वयं इन गतिविधियों में रुचि लेते थे। मिट्टी से उनका लगाव केवल वैचारिक नहीं था, वह अपने हाथों से खेत में काम करते, सब्जियों की क्यारियों को निहारते और मवेशियों की सेवा करते थे। इस फॉर्म हाउस में दर्जनों गोधन (गाय-भैंस) रखे गए थे, जिनकी देखभाल में वह कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते थे। उनके लिए ये मवेशी केवल कृषि सहायक नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा थे। जमीन से जुड़कर राजनीति में अलग सोच रखने वाले शख्स थे गुरुजी
फार्म हाउस में राजनेता से अलग साधारण इंसान की तरह रहते थे गुरुजी चीराचास का यह फॉर्म हाउस प्रकृति से जुड़ाव, सादगी, आत्मनिर्भरता और जनसेवा का संगम। यह एक ऐसा स्थल था, जहां राजनेता की भूमिका से इतर, एक किसान, एक समाजसेवी और एक आध्यात्मिक पुरुष के रूप में दिशोम गुरु का स्वरूप दिखाई देता था।आज भी यह फॉर्म हाउस झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना का साक्षी स्थल है। संकट की घड़ियों में मंथन करते थे फार्म हाउस में केंद्रीय कोयला मंत्री बनने के बाद दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने यह एंबेसडर कार खरीदी थी। इसी कार से चलते थे। बाद में यह कार बोकारो में रख दिए। अपने गांव नेमरा में अपनी मां सोनामुनी देवी के साथ दिशोम गुरु शिबू सोरेन और उनके भाई राजाराम सोरेन, शंकर सोरेन, लालू सोरेन और रामू सोरेन। बोकारो में एक स्कूल के कार्यक्रम में आए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से बोकारो निवास में मिलकर झारखंड के विकास पर चर्चा की थी। बोकारो के अपने पुराने सहयोगी चास के प्रयाग चंद्र केजरीवाल के साथ बोकारो सेक्टर 1 स्थित आवास में मंथन करते दिशोम गुरु शिबू सोरेन। रामगढ़ में झामुमो के अधिवेशन के दौरान तीर चलाकर कार्यकर्ताओं में जोश भरते महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन। कोयला मंत्री की कार अब स्मृति बनी हमेशा झारखंड के विकास की सोच दिल में पुराने साथियों को देते थे अहमियत महाजनी प्रथा के खिलाफ बने महानायक यादों में धरती पुत्र… दिशोम गुरु फॉर्म हाउस की एक विशेषता यह भी रही कि यह कई बार राजनीतिक चिंतन और विमर्श का केंद्र बना। महत्वपूर्ण चुनावों के पहले, संकट की घड़ियों में या रणनीतिक संवादों के लिए, यही स्थल नेताओं की बैठकों का मंच बनता था। झारखंड के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता अक्सर यहीं गुरुजी से मिलने आते थे। यहां की शांति और प्रकृति की गोद में बैठकर पार्टी की दिशा, आदिवासी हित और झारखंड आंदोलन के भविष्य को लेकर मंथन होता था। कई बार राष्ट्रीय स्तर के नेता भी इस स्थान पर आए और गुरुजी से परामर्श लिया।


