बीएसएल व विस्थापन के मुद्दे पर मुखर रहे शिबू सोरेन का बोकारो की इस औद्योगिक शहर की जन समस्याओं को गंभीरता से लिया और समय-समय पर आंदोलनों और संघर्षों के माध्यम से आवाज बुलंद की। चाहे विस्थापन का मामला हो या बोकारो स्टील प्लांट के मजदूरों की समस्याएं, गुरुजी ने इन मुद्दों को दिल्ली तक पहुंचाया। स्थानीयता और जनजीवन से जुड़ाव उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत थी। बोकारो | झारखंड की राजनीति के पुरोधा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का बोकारो से विशेष नाता था। बोकारो के सेक्टर-1 स्थित उनका आवास सिर्फ एक निवास नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति का वह केंद्र था, जहां से अनेक आंदोलनों, निर्णयों और रणनीतियों की दिशा तय होती थी। गुरुजी के जीवन का एक बड़ा हिस्सा यहीं गुजरा और इसी कारण यह औद्योगिक नगर धीरे-धीरे झारखंडी राजनीति की धड़कन बन गया। जब शिबू सोरेन कोयला मंत्री या झारखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए बोकारो आते थे, तब तो लगता था मानो राज्य की सत्ता बोकारो में सिमट आई हो।


