जैनामोड़ से 1973 में महाजनी प्रथा और नशा के विरोध में शिबू ने शुरू किया था आंदोलन

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड आंदोलन के प्रणेता रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से पूरा झारखंड शोक में डूब गया है। वहीं जैनामोड़ व आसपास के लोग भी गहरे शोक में है। चूंकि शिबू सोरेन का बोकारो जिला के जरीडीह प्रखंड से शुरुआत से गहरा वास्ता रहा है। आज भी जैनामोड़ में उनकी बहन व भाई स्व. रामू सोरेन की प|ी का आवास है। राजनीति की शुरुआती दौर में करीब 1973 में जरीडीह प्रखंड से आदिवासी विकास मंच व आदिवासी सुधार समिति नशा विरोधी और महाजनी प्रथा के विरोध में बड़ा आंदोलन का शंखनाद किए थे। इंद्रजीत मांझी, फुलेश्वर मांझी, डॉ. काशी महतो, हिमांशु महतो, कार्तिक मांझी, रामा मांझी, महेश्वर मांझी, सिंधु चरण हेंब्रम, किस्टो आदि के साथ वे 1984 तक आंदोलन करते रहे। बसंत सोरेन की बड़ी सास के श्राद्ध में पहुंचे थे गुरुजी 9 जनवरी 2021 को जरीडीह प्रखंड के खुंटरी पंचायत स्थित कुशुलमुण्डू आवास में दुमका के विधायक बसंत सोरेन की बड़ी सास स्व. गंगोत्री देवी के श्राद्ध कार्यक्रम में भी शिबू सोरेन शामिल हुए थे। वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन सहित पूरे परिवार के साथ पहुंचे थे। फार्म का गुरुजी ने किया था उद्घाटन | बेरमो विधायक सह इंटक के राष्ट्रीय महासचिव रहे स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह के आमंत्रण पर पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जरीडीह प्रखंड के तेतरियाडीह स्थित राजेंद्र सिंह के फार्म हाउस पर पहुंचे थे। वे मुख्य अतिथि के रुप में डेयरी फार्म का उद्घाटन किया था। गोमिया विस सीट पर हमेशा केंद्र बिंदु रहे भाजपा में जनसंघ के समय से राजनीति करते हुए कई बार विधायक चुने गए छत्रू राम महतो का टिकट भाजपा ने 2009 में काट दिया, तो उन्हें भी अंतिम समय में झामुमो का प्रत्याशी बनाकर गोमिया से चुनाव लड़ाया। उनके पक्ष में खैराचातर में चुनावी सभा में हेलीकाप्टर से शिबू सोरेन आए। हालांकि उस समय छत्रू महतो को पराजय मिली। वहीं दूसरी ओर जब आजसू के द्वारा 2014 में योगेंद्र महतो को टिकट नहीं मिली, तो उस समय भी शिबू सोरेन ने योगेंद्र महतो को पार्टी से टिकट दिया और वह पहली बार विधायक बने।

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