‘काला हिरण’ मामले में सुनवाई, अगली तारीख 8 सप्ताह बाद:सलमान ने सजा के फैसले को, तो सरकार ने पांच अन्य को बरी करने को दी थी चुनौती

राजस्थान हाईकोर्ट में आज जस्टिस संदीप शाह की कोर्ट में वर्ष 1998 के काला हिरण शिकार मामले की सुनवाई हुई। इसमें राज्य सरकार की ओर से दायर लीव टू अपील और सलमान खान की ओर से सजा के फैसले को चुनौती देने की याचिका शामिल है। इन दोनों पर एक साथ विचार हुआ। हालांकि, मामले में सरकारी वकील ने समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। मामले में बिश्नोई समाज के वकील महिपाल बिश्नोई ने कहा- राज्य सरकार की ओर से पेश लीव टू अपील और सलमान खान द्वारा अधीनस्थ न्यायालय से मिली सजा के खिलाफ अपील, जो पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर की गई थी, दोनों पर एक साथ सुनवाई हुई। इस केस से संबंधित जो भी पक्षकार व उनके वकील हैं, उनके नाम शॉर्ट लिस्ट करके सूचीबद्ध करने के आदेश हुए हैं। अब अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद होगी। यह मामला अक्टूबर 1998 में जोधपुर के कांकाणी गांव में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान काले हिरण के शिकार का है। इस केस में जोधपुर की सीजेएम कोर्ट ने 5 अप्रैल 2018 को सलमान खान को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा और 25,000 रुपए जुर्माना लगाया था। जबकि, सह-आरोपी सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, नीलम और दुष्यंत सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। बरी के फैसले को चुनौती के लिए राज्य सरकार की लीव टू अपील राजस्थान सरकार ने सह-आरोपियों की बरी के खिलाफ लीव टू अपील दायर की है। सरकार का कहना है कि सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, नीलम और दुष्यंत सिंह को बरी करना न्यायसंगत नहीं था। विश्नोई समुदाय, जो वन्यजीव संरक्षण में दृढ़ विश्वास रखता है, ने मूल शिकायत दर्ज करवाई थी। आज की सुनवाई में दोनों पक्षों की अपीलों पर एक साथ सुनवाई हुई। सलमान की याचिका भी सुनवाई में शामिल इस साल 14 फरवरी 2025 को पहली सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने मामले की जटिलताओं को देखते हुए अगली सुनवाई 15 अप्रैल की तारीख तय की थी। फिर 16 मई 2025 को दूसरी सुनवाई में कोर्ट ने मामले को 28 जुलाई की तारीख पर सलमान खान की अपील के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था। तीसरी सुनवाई 28 जुलाई को हुई। जिसमें सलमान खान द्वारा अपनी सजा के खिलाफ जिला सत्र न्यायाधीश जोधपुर के समक्ष दायर की गई अपील को भी हाईकोर्ट में रजिस्ट्रेशन कर 22 सितंबर को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था। लीव टू अपील यानी ‘अपील की अनुमति’ मांगना लीव टू अपील का मतलब है “अपील की अनुमति” या “अपील दायर करने की विशेष अनुमति लेना”। कुछ मामलों में, खासकर आपराधिक मामलों में, जब किसी आरोपी को बरी कर दिया जाता है, तो राज्य सरकार या शिकायतकर्ता को उसके खिलाफ सीधे अपील दायर करने का अधिकार नहीं होता। ऐसे मामलों में पहले अदालत से अनुमति लेनी पड़ती है कि वे अपील दायर कर सकते हैं या नहीं। इस मामले में राजस्थान सरकार ने लीव टू अपील दायर की है। यानी, सरकार ने हाईकोर्ट से अनुमति मांगी है कि वह सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, नीलम और दुष्यंत सिंह को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर कर सके। सरकार का मानना है कि लोअर कोर्ट ने इन सभी को गलत तरीके से बरी किया है। लीव टू अपील की स्वीकृति या अस्वीकृति पूरी तरह से कोर्ट के विवेक पर निर्भर करती है। कोर्ट यह देखती है कि क्या वास्तव में कोई कानूनी मुद्दा है, जिसकी समीक्षा की जानी चाहिए। यदि कोर्ट को लगता है कि अपील में दम है, तो वह लीव टू अपील की अनुमति दे देती है। इसके बाद वह मामला नियमित अपील बन जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *