सागर के राहतगढ़ वन परिक्षेत्र में काले हिरणों के शिकार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुनाफे के लालच में, शिकारी इन जानवरों को मार रहे थे और उनके मांस को भोपाल और मुंबई जैसे शहरों में सप्लाई कर रहे थे। इसके बाद रईसों की पार्टियों और होटलों में परोसा जाता था। एक प्लेट मांस की कीमत 2000 से 2500 रुपए तक होती थी, जबकि एक किलो काले हिरण के मांस की कीमत 10 से 12 हजार रुपए तक पहुंच जाती थी। मांस के साथ-साथ खाल, सींग और दांत भी अलग-अलग दामों पर बेचे जाते थे। इसमें स्थानीय लोग मांस और पैसों के लालच में नेटवर्क का हिस्सा बन गए थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें शिकार में मदद करने के बदले मांस और पैसे मिलते थे। जानकारी के अनुसार भोपाल से शिकारी डॉक्टर को बुलाया जाता था, जो शिकार को अंजाम देता था। पूछताछ में जांच टीम को कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर भी मिले हैं, जिनकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है। महू और भोपाल के शिकार मामलों में पकड़े गए आरोपियों की सीडीआर से इन नंबरों का मिलान कर मांस तस्करी के पूरे नेटवर्क को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है। अब पढ़िए पूरा मामला…10 किलो मांस बरामद 4 दिसंबर की रात राहतगढ़ वन परिक्षेत्र की बेरखेड़ी बीट स्थित टेहरा-टेहरी जंगल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर वन विभाग की टीम अलर्ट हो गई। मुखबिर के अनुसार टीम ने जंगल के रास्ते पर नाकाबंदी की और जवान झाड़ियों में छिपकर संदिग्ध वाहनों के लौटने का इंतजार करने लगे। रात करीब 3 बजे दो कारें जंगल से बाहर आती दिखाई दीं। टीम ने घेराबंदी कर दोनों वाहनों को रोक लिया। तलाशी के दौरान कारों से काले हिरण का करीब 10 किलो मांस, उसकी खाल, सागौन की लकड़ी, 22 बोर की राइफल, 15 जिंदा कारतूस और तीन खाली खोखे बरामद किए गए। वाहनों में सवार तीनों आरोपियों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम बीएचएमएस डॉक्टर वसीम खान निवासी मंडी बामौरा (हाल निवासी भोपाल), ओमकार आदिवासी निवासी टेहरा-टेहरी और राजू आदिवासी निवासी सेमरामेढ़ा बताए। वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। प्राथमिक पूछताछ के बाद सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। लाइसेंसी बंदूक से किया शिकार, पहले दो फायर मिस
शिकार करने के लिए मुख्य आरोपी डॉ. वसीम खान भोपाल से अपनी कार से राहतगढ़ पहुंचा था। वहां उसने अपने सहयोगियों की मदद से टेहरा-टेहरी के जंगल में प्रवेश किया। घटना 4 दिसंबर की रात करीब 1 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। जंगल में काले हिरण को देखते ही डॉ. वसीम ने उस पर लगातार दो फायर किए, लेकिन दोनों निशाने चूक गए और हिरण बच निकला। इसके बाद आरोपी ने हिरण का पीछा किया और तीसरे फायर में उसे मार गिराया। शिकार के बाद आरोपी ने धारदार चाकू और बका की मदद से हिरण की खाल उतारी और मांस के टुकड़े कर उन्हें दो बोरियों में भर लिया। जांच में सामने आया कि डॉ. वसीम शिकार के लिए अपनी लाइसेंसी 22 बोर बंदूक लेकर आया था, जिसे उसने मॉडिफाई कर रखा था। सटीक निशाना और रात के समय शिकार को आसान बनाने के लिए बंदूक पर टॉर्च और दूरबीन भी लगाई गई थी। शिकार में किस आरोपी की क्या भूमिका रही
काले हिरण के शिकार मामले में वन विभाग ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक आरोपी की शिकार में अलग-अलग भूमिका रही। आरोपी राजू आदिवासी ने शिकार के लिए अपना बोलेरो वाहन उपलब्ध कराया और शिकारी के साथ सहयोगी के रूप में जंगल गया। आरोपी ओमकार आदिवासी ने शिकार से पहले और दौरान हिरण की निगरानी की और पूरी घटना के समय मौके पर मौजूद रहा। वहीं मुख्य आरोपी डॉ. वसीम खान ने बंदूक से फायर कर काले हिरण का शिकार किया। रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में यह भी सामने आया है कि करीब दो महीने पहले आरोपी वसीम राहतगढ़ क्षेत्र में आया था। उस दौरान उसने स्थानीय मददगारों की सहायता से करीब तीन खरगोश का शिकार किया था। शिकार के बाद वह मांस अपने साथ ले गया था। सुरक्षित तरीके से शिकार करने के बाद ही वह दोबारा काले हिरण के शिकार के लिए राहतगढ़ के जंगलों में पहुंचा, जहां इस बार उसे पकड़ लिया गया। मांस और पैसों के लालच में जुड़े स्थानीय लोग
काले हिरण के शिकार मामले में गिरफ्तार आरोपी राजू आदिवासी और ओमकार आदिवासी मांस और पैसों के लालच में इस नेटवर्क से जुड़े थे। शिकार के दौरान आरोपी राजू अपना बोलेरो वाहन लेकर गया था, जिसमें मुख्य आरोपी ने 700 रुपए का डीजल भरवाया था। वहीं, आरोपी ओमकार भी शिकार में सहयोग के लिए साथ गया था। इसके बदले दोनों को शिकार किए गए वन्यजीव का मांस दिया जाता था, साथ ही खर्चे के नाम पर 500 से 1000 रुपए तक मिलते थे। जांच में सामने आया है कि वन्यजीवों के मांस की मांग करने वाला यह नेटवर्क सागर के राहतगढ़ से भोपाल होते हुए मुंबई तक फैला हुआ है। यदि किसी को वन्यजीव का मांस चाहिए होता था, तो वह राहतगढ़ क्षेत्र में रहने वाले मास्टरमाइंड को फोन करता था। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार वन्यजीव का नाम बताता और मांस की व्यवस्था का ऑर्डर देता था, जिसके बदले एडवांस राशि ली जाती थी। ऑर्डर मिलने के बाद फरार मास्टरमाइंड स्थानीय ऐसे लोगों को वन्यजीव की निगरानी का जिम्मा देता था, जो जंगल की भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह परिचित हों। ये लोग लगातार निगरानी कर वन्यजीवों की लोकेशन ट्रेस करते थे। इसके साथ ही कुछ लोग वन विभाग की हर गतिविधि पर नजर रखते थे। वन्यजीव की लोकेशन पुख्ता होने और शिकार की जगह तय होने के बाद मास्टरमाइंड शिकारी डॉ. वसीम को फोन कर बुलाता था। डॉ. वसीम देर रात 1 से 3 बजे के बीच जंगल पहुंचता और शिकार कर 1 से डेढ़ घंटे के भीतर मांस लेकर निकल जाता था। यह मांस भोपाल सहित मुंबई की रईस पार्टियों और होटलों में सप्लाई किया जाता था। कॉल डिटेल और टावर लोकेशन खंगालेगी जांच टीम
रिमांड के दौरान एसटीएफ ने आरोपियों से बैंक खातों, मोबाइल नंबरों सहित अन्य अहम जानकारियां जुटाई हैं। हालांकि अब तक बैंक खातों से कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। जांच में शिकार के समय किए गए कुछ मोबाइल कॉल नंबर चिन्हित किए गए हैं, जिनकी कॉल डिटेल (सीडीआर) खंगाली जा रही है। इन नंबरों के धारकों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही टीम को आशंका है कि शिकार के दौरान और भी लोग मौके पर मौजूद थे। इस एंगल से संबंधित क्षेत्र की टावर लोकेशन निकलवाई जा रही है। वन विभाग का मानना है कि यह मामला संगठित वन्यजीव अपराध से जुड़ा है, इसलिए हर बिंदु पर बारीकी से जांच की जा रही है। वन विभाग के जानकारों के अनुसार, कुछ लोग काले हिरण का मांस खाने का शौक रखते हैं। बड़े शहरों और रईसों की पार्टियों में इसकी मांग अधिक रहती है। अनुमान है कि पकाए जाने के बाद काले हिरण का मांस 2000 से 2500 रुपए प्रति प्लेट तक बेचा जाता है, जबकि एक किलो मांस की कीमत 10 से 12 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। इसके अलावा हिरण की खाल और अन्य अवशेष भी बेचे जाते हैं, जिससे शिकार और इसमें शामिल गिरोह को भारी मुनाफा होता है। मुंबई सप्लाई करते थे मांस
प्रशिक्षु आईएफएस व जांच अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि रिमांड में आरोपियों से पूछताछ की गई। एक मास्टरमाइंड का नाम सामने आया है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तारी होने पर उससे पूछताछ में नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट में काले हिरण के शिकार का मामला विचाराधीन है। उक्त मामले में भी काले हिरण का शिकार राहतगढ़ के जंगल में हुआ था। आरोपी मांस मुंबई की होटल में सप्लाई करते थे। इसलिए इस एंगल पर भी जांच की जा रही है। आरोपियों की कॉल डिटेल और अन्य जानकारी निकाली जा रही है। जल्द ही मामले में नए खुलासे हो सकते हैं। ये भी पढ़ें… रईसों-पॉलिटिकल परिवारों में सप्लाई होता था काले हिरण का मांस इंदौर के पास महू के किशनगंज थाना क्षेत्र में दिसंबर 2024 में 3 शिकारियों को गिरफ्तार किया था। इनकी कार से काले हिरण का मांस बरामद हुआ था। अब टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने चौथे आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। उसने बताया कि वह रईस और पॉलिटिकल परिवारों को मांस सप्लाई करता था। वॉट्सएप ग्रुप पर खरीदार खोजता था। कई खरीदार उससे टेलीग्राम के माध्यम से भी जुड़े हुए थे। पढ़ें पूरी खबर…


