बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड की ग्राम पंचायत बोथी के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक खेती की जमीनों के सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उनकी जमीनों पर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए हैं, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि एक ही जमीन के रकबे में छह-छह लोगों के नाम दर्ज हैं। वे जिस जमीन पर वर्षों से खेती कर रहे हैं, उसके सरकारी दस्तावेजों में किसी और का नाम लिखा है। इसका परिणाम यह है कि फसल बीमा का लाभ उन लोगों को मिल रहा है जिनका नाम कागजों में है, जबकि खेती का वास्तविक खर्च और मेहनत स्थानीय किसान ही उठा रहे हैं। इस गड़बड़ी के कारण किसान न तो अपनी जमीन बेच पा रहे हैं और न ही उसे बटाई पर दे पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले सात-आठ वर्षों से लगातार इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, तहसीलदार ने भी मौके का दौरा किया था और किसानों को तहसील में केस फाइल करने के लिए कहा था। हालांकि, अधिकांश किसान आदिवासी और कम पढ़े-लिखे होने के कारण आवश्यक दस्तावेज तैयार नहीं कर सके। कई मामलों में किसानों के दावे निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल होने का खतरा पैदा हो गया है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने कलेक्टर बैतूल को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि ग्राम बोथी में राजस्व विभाग का एक विशेष शिविर आयोजित किया जाए ताकि खसरा-नक्शों में हुई त्रुटियों को सुधारा जा सके। ग्रामीणों ने इन गड़बड़ियों के लिए राजस्व अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। ज्ञापन पर रामलाल पाटले, चंद्रजी पाटले, तुलसीराम उइके, प्रमलाल शेवरे, कमलसिंह, मुरन सिंह, जपरी और भालू ठाकुर सहित कई ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने खसरे और नक्शे की गड़बड़ी दूर कर न्याय दिलाने की अपील की है।


