डिंडोरी में मंगलवार को पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के वन ग्राम चकरार से सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने वन विभाग द्वारा मुनारा (सीमा स्तंभ) निर्माण रोकने और वन अधिकार के तहत पट्टा दिलाने की मांग को लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के नाम तहसीलदार आर.पी. मार्को को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग के सर्वे के बाद उनकी काबिज जमीन पर मुनारा बनाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह उनकी पैतृक भूमि है जिस पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और राजस्व विभाग से मिलकर नक्शा सुधारने की मांग की है। ग्रामीण छोटे लाल और सोन सिंह ने जानकारी दी कि वे वन ग्राम चकरार, ग्राम पंचायत ठाडपत्थरा में अंग्रेजों के शासन से पहले से निवास कर रहे हैं। अंग्रेजों ने 1922 में वन विभाग का गठन किया और 1927 में कानून बनाकर गांवों में आबादी व जंगल का सर्वेक्षण कराया था। तब हर 200 मीटर पर मुनारा के नाम पर पत्थरों के ढेर लगवाए गए थे, जिससे जंगल और काश्तकारी की सीमाएं निर्धारित की गई थीं। ग्रामीणों के अनुसार, 2006 और 2007 के संशोधन नियम 2012 के तहत राजस्व ग्राम के लिए संपरिवर्तन की कार्यवाही के दौरान भूमि सर्वेक्षण में उनके पूर्वजों की काबिज जमीन जंगल में जा रही है। वे 2006 के कानून का हवाला देते हुए कहते हैं कि 3 दिसंबर 2005 से पहले से काबिज जमीन का पट्टा देने का प्रावधान है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से वन विभाग और राजस्व विभाग को निर्देशित कर वन नक्शा सुधरवाने और वन अधिकार के तहत उन्हें पट्टा दिलाने की मांग की है।


