किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में 6 अक्टूबर को जयपुर में होने वाली बड़ी अन्नदाता हुंकार रैली स्थगित हो गई है। इसे रामपाल जाट के नेतृत्व में किसान नेताओं की जयपुर में संबंधित उच्चाधिकारियों के साथ हुई बैठक में बनी सहमति के बाद स्थगित किया गया है। सरकार की ओर से आए अधिकारियों ने किसानों की मांगों पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है। उसके बाद रामपाल जाट ने अग्रिम तिथि तक यह अन्नदाता हुंकार रैली स्थगित करने सहमति दे दी। इस दौरान जाट ने कहा कि जल्द इन किसान हितों को लेकर रखी गई मांगो को सरकार नहीं मानेगी तो फिर जयपुर में किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। वार्ता के लिए बुलाया किसान युवा महापंचायत के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने बताया- 6 अक्टूबर को अन्नदाता हुंकार रैली जयपुर शिप्रा पथ मानसरोवर में आयोजित होने जा रहा थी। उससे तीन दिनों पहले ही सरकार द्वारा वार्ता करने के लिए किसान नेता रामपाल जाट को राजस्थान पदाधिकारियों के साथ बैठक करने के लिए पुलिस कमिश्नर जयपुर बीजू जॉर्ज ने निमंत्रण दिया था। पिछले तीन महीनों से राजस्थान भर में किसान महापंचायत पदाधिकारियों की तैयारियों को लेकर सरकार को मिले इनपुट को देखते हुए दो दिनों से किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट से सरकार के अधिकारी बात करना चाह रहे थे। इसके तहत शुक्रवार दोपहर से शाम तक सरकार का प्रतिनिधित्व संभागीय आयुक्त जयपुर पूनम समेत कृषि, जल संसाधन, सहकारिता विभाग आदि के अधिकारियों से जाट की वार्ता हुई। किसानों की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के अलावा किसान महापंचायत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घासीराम फगोडिया, प्रदेशाध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव,युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी, प्रदेश महामंत्री सुन्दर लाल, जगदीश नारायण खुडियाला,प्रदेश प्रवक्ता सुरेश बिजारणियां , जिला अध्यक्ष अजमेर, प्रहलाद खुरड़िया खेरथल तिजारा जिला अध्यक्ष विरेन्द्र चौधरी, दूदू जिला अध्यक्ष बलदेव महरिया, उपाध्यक्ष सीताराम खादवाल, तहसील अध्यक्ष निवाई दशरथ सिंह चौहान, तहसील महामंत्री नवल सिंह राजावत आदि मौजूद रहे। किसानों एवं प्रशासन के मध्य इन मुद्दों पर पॉजिटिव बात हुई: 1. प्रदेश भर में सुअरों समेत अन्य बेसहारा पशुओं से फसलें खत्म होने के कगार पर है। सरकार निवाई तहसील समेत अन्य जगह से सुअरों का उठाव करें तथा गौ वंश के लिए अभयारण्य की तरह का निर्माण बनेठा -ककोड़ की 10 हजार बीघा जमीन में करें। 2. बीसलपुर बांध या ईसरदा बांध से निवाई क्षेत्र को नहीं तन्त्र से जोड़ा जाए। 3. भूमि अवाप्ति कानून में राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना में परिवर्तन करते हुए ईसरदा बांध विस्थापित व्यक्तियों को 5 लाख के स्थान पर 20 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। क्योंकि 2013 में 5 लाख देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन 12 साल बाद भी 5 लाख दिया जाना महंगाई के अनुसार पर्याप्त नहीं है। 4.बीसलपुर बांध विस्थापित को अवॉर्ड जारी किए गए थे, उसकी समयावधि 2017 के स्थान पर 2027 किया जायें। बीसलपुर स्थापित परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। 5.फसल बीमा में क्रॉप कटिंग का आकलन सार्वजनिक करें। राजस्व विभाग का कार्य फ़सल बुआई से करें उस डेटा को बैंक उठा ले ताकि बैंक एवं राजस्व का आकलन समान हों। 6. विभिन्न विसंगतियों के कारण दूनी राजस्व सेटलमेंट को रद्द करें। 7. अप्रैल, मई में बीसलपुर ,गलवा बांध नहरों की सफाई। 9. नगरफोर्ट व उनियारा 2023-2024 का मुआवजा आपदा राहत कोष से दिलाया जाये एवं 2024 – 2025 सम्पूर्ण जिले का फसल मुआवजा 2025-26 का मुआवजा तैयार कर वितरण व्यवस्था करें। राजस्थान स्तर पर ये मुद्दे उठाए: 1. न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटी कानून बनाया जाए। 2.छोटे-छोटे बांधों में पेयजल के लिए पानी आरक्षित नहीं रखें। 3.प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समितियों को खरीद केन्द्र बनाया जाए। 3.वर्ष 2017 से पहले की तर्ज पर राजफैड से उर्वरक वितरण कराया जाए। जिससे टैगिंग की समस्या समाप्त हो सकें। 4.संभागीय आयुक्त द्वारा राजस्थान सरकार को इन बिंदुओं के साथ अन्य राजस्थान के जिलों के मुद्दों को सकारात्मक रूप से पहुंचाया जाएगा। 5.जल्द ही वार्ता राजस्थान सरकार की उच्च मंत्री मंडल स्तरीय तय की जाएगी। 6 अक्टूबर अन्नदाता हूं कर रैली को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाना का फैसला राजस्थान भर के आए किसानों के समक्ष लिया गया।


