किसान भीम सिंह यादव बने जैविक खेती के प्रेरणास्रोत:रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद अपनाकर खेती की तकनीक में किया बदलाव, दूसरे किसानों को कर रहे प्रेरित

खैरथल-तिजारा जिले की पंचायत समिति मुंडावर की ग्राम पंचायत सूरजपुरा में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर में स्थानीय कृषक भीम सिंह यादव ने अपनी मेहनत और नवाचार से आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत की। उन्होंने जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर यह साबित किया कि सही दिशा और सरकारी योजनाओं का समुचित उपयोग खेती को लाभकारी और टिकाऊ बना सकता है। रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद इस्तेमाल की भीम सिंह यादव ने रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खादों को अपनाकर अपनी खेती की पद्धति में बदलाव किया। इस पहल से न केवल फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य भी लगातार बेहतर हुआ है। जैविक खेती के साथ-साथ उन्होंने पशुपालन को भी आय का एक मजबूत साधन बनाया है। वर्तमान में उनके पास एक देशी गाय, एक भैंस, दो पाड़ी और एक बछड़ी है, जो उन्हें नियमित आय प्रदान करती हैं। एप्पल प्रजाति के 150 बेर के पौधों का रोपण किया फलोत्पादन के क्षेत्र में भी उन्होंने नवाचार किया है। जून 2025 में उन्होंने थाई एप्पल प्रजाति के 150 बेर के पौधों का रोपण किया। इस बगीचे में सरकारी योजना के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है,जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन संभव हो सका है। दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित उन्होंने अपने खेत पर एक वर्मीकम्पोस्ट इकाई स्थापित की है, जिससे वे नियमित रूप से जैविक खाद का उत्पादन करते हैं। इस खाद का उपयोग वे अपनी खेती में करते हैं और साथ ही आसपास के किसानों को उच्च गुणवत्ता के केंचुए उपलब्ध कराकर उन्हें भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था हेतु वे पिछले पांच वर्षों से नेपीयर घास का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे साल भर चारे की कोई कमी नहीं रहती। काले गेहूं की उन्नत किस्म की खेती भी अपनाई फसली विविधता के तहत उन्होंने सामान्य गेहूं के साथ-साथ काले गेहूं की उन्नत किस्म की खेती भी अपनाई है। इसके अलावा, कृषि वानिकी को बढ़ावा देते हुए उन्होंने खेत की मेड़ों पर 300 महोगनी पौधों का रोपण किया है, जिससे भविष्य के लिए स्थायी आय का एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। भीमसिंह यादव ने सरकारी विभागीय योजनाओं का लाभ उठाते हुए फार्म पॉण्ड, वर्मीकम्पोस्ट इकाई, ड्रिप सिंचाई, मिनी फव्वारा प्रणाली और तारबंदी जैसी सुविधाएं स्थापित कीं, जिन पर उन्हें अनुदान भी प्राप्त हुआ।

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