भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा अब किसान चार दिन ही रबी की फसलों का बीमा करा सकेंगे। 31 दिसंबर के बाद सरकार की इस योजना का लाभ नहीं लिया जा सकेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी मौसम के लिए गेहूं, जो, चना, सरसों, मसूर व ईसबगोल की फसलों की बीमा सुरक्षा आगामी 31 दिसंबर तक ही ली जा सकेगी। बीमा प्रीमियर की बीमित राशि की ईसबगोल के लिए 5 व दूसरी फसलों के लिए डेढ़ प्रतिशत तय कर रखी है। शेष प्रीमियम राशि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बराबर अनुपात में अनुदान स्वरूप दी जाएगी। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत आंवला, बैंगन, फूलगोभी, लहसुन, अमरूद, नींबू, आम व टमाटर की फसल का भी बीमा करवाया जा सकता है। जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड ले रखा है, वे स्वत: ही इस योजना का लाभ ले सकेंगे। यदि किसान क्रेडिट कार्ड में अंकित फसल के अलावा अन्य फसल की बुआई की है तो वे किसान 29 दिसंबर तक बैंक को बुआई की गई फसल की जानकारी खसरावार दे सकते हैं, ताकि उन्हें फसल खराब होने की स्थिति में बुआई की गई फसल का बीमा कवरेज उपलब्ध हो सके। कृषि विभाग के अनुसार जो किसान केसीसी धारी नहीं है, वे भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं तो वे बैंक, सीएससी अथवा फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से बीमा करवा सकते हैं। योजना से जुड़ने के लिए भू-स्वामित्व के साक्षय, जमीन कब्जे में होने का प्रमाण पत्र, बैंक खाता संबंधी साक्ष्य, आधार कार्ड की प्रति ऑनलाइन जमा करचाने होंगे। साथ ही एक स्व-प्रमाणित घोषणा पत्र, जिसमें हर खसरा संख्या का कुल क्षेत्र, प्रस्तावित फसल का बुआई क्षेत्र, मालिक का नाम, बीमा हित का प्रकार अंकित कर प्रस्तुत करना होगा। बंटाइदार किसान भी जुड़ सकता है योजना से बंटाइदार किसान चाहे तो वे भी फसल बीमा योजना से जुड़ सकते हैं। बंटाइदार किसान को संबंधित खातेदार से लिखित में यह शपथ पत्र 100 रुपए के नोटरी पब्लिक से प्रमाणित स्टांप प्रस्तुत करेगा कि उस खातेदार द्वारा जमीन बंटाई पर दी गई है, उसे स्वयं के बैंक खाते की प्रति उपलब्ध करवानी होगी। उसे राजस्थान का मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र, जिस किसान से जमीन बंटाई पर ली, उसका आधार कार्ड भी प्रस्तुत करना होगा। खड़ी फसल बुआई से कटाई में सूखा, लंंबी सूखा अवधि, बाढ़, जल प्लावन, कीट एवं व्याधि, भूस्खलन, बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तुफान, ओलावृष्टि और चक्रवात के कारण उपज में नुकवान के लिए व्यापक जौखिम बीमा राज्य सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त उपज आंकड़ों के आधार पर होगा। सबसे अधिक 62 हजार हैक्टेयर में गेहूं व 56 हजार में चना की बुआई…. इस बार जलाशयों में पर्याप्त पानी होने से किसानों ने सबसे अधिक करीब 62 हजार हैक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई। उसके बाद करीब 56 हजार हैक्टेयर में चना बोया गया, जबकि सरसों केवल 13 हजार हैक्टेयर में ही बोई गई। इसके अलावा किसानों ने जौ, जीरा, रिजका, मैथी आदि फसलों की भी बुआई कर रखी है। देर तक बारिश जारी रहने से नमी के चलते सरसों व चना की फसल अभी तक अच्छी है। वर्तमान में इन फसलों में किसी रोग का प्रकोप नहीं है, लेकिन शीतलहर से बचाना मुश्किल है।


