राजस्थान की विख्यात शिक्षा नगरी कुचामन सिटी ने एक बार फिर पूरे प्रदेश को सामाजिक एकता और समरसता का बड़ा संदेश दिया है। स्वामी ओमदास महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित वाल्मीकि समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रेम और भाईचारे की एक नई कहानी लिखी गई। इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य आयोजन प्रभुराम पोषक और रामनिवास पोषक द्वारा सामाजिक समरसता को अटूट बनाए रखने के संकल्प के साथ संपन्न किया गया। कन्यादान के जरिए तोड़ी गईं जातिगत दीवारें इस समारोह की सबसे विशेष और भावुक करने वाली बात यह रही कि पोषक परिवार ने वाल्मीकि समाज की पुत्री के फेरों में बैठकर कन्यादान की रस्म निभाई। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का इस तरह आगे आकर विवाह की रस्मों में शामिल होना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह कदम सामाजिक भेदभाव को मिटाने की दिशा में एक सशक्त पहल माना जा रहा है। नव-दम्पत्तियों के लिए आर्थिक संबल की घोषणा पोषक परिवार की ओर से परिणय सूत्र में बंधे सभी सात जोड़ों के उज्जवल भविष्य के लिए विशेष आर्थिक सहयोग सुनिश्चित किया गया: सावधि जमा (FD): प्रत्येक वधू के नाम पर 11,000 रुपये की एफडी भेंट की गई। आभूषण उपहार: नव-विवाहित जोड़ों को सोने और चांदी के उपहार प्रदान किए गए। भोज की व्यवस्था: आयोजन में पधारे सभी मेहमानों और आगंतुकों के लिए भोजन की संपूर्ण व्यवस्था पोषक परिवार द्वारा की गई। संतों का मार्गदर्शन और मानवीय मूल्य स्वामी ओमदास महाराज के आशीर्वाद के साथ संपन्न हुए इस समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि इंसानियत और आपसी प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है। संतों की उपस्थिति ने इस सामाजिक समागम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की, जहां समाज के हर वर्ग ने एकजुटता का परिचय दिया। खुशहाल जीवन की कामना और भविष्य की राह पोषक परिवार ने इस अवसर पर सभी नव-विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके आगामी जीवन के खुशियों से भरा रहने की कामना की। इस आयोजन की सफलता ने कुचामन सिटी के सामाजिक ताने-बाने को और अधिक मजबूती प्रदान की है, जिसकी चारों ओर सराहना हो रही है। यह आयोजन भविष्य के लिए एक नजीर बन गया है कि कैसे सामूहिक प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।


